ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को न हाईकोर्ट और न ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश की परवाह है। जिलाधिकारी के आदेश पर एक तरफ तो विभाग सरकारी मेला भूमि पर अतिक्रमण की सूची बना रहा है तो दूसरी ओर सप्तरोवर में उसके स्वामित्व की मेला प्लाट में अवैध रूप से निर्माण करा लिया है। सिंचाई खंड हरिद्वार के अधिकारियों को इसकी जानकारी भी है। इसके बाद भी चुप्पी साधी जा रही है।
एनजीटी ने गंगा से सौ मीटर परिधि में किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाई हुई है। इसका मकसद गंगा को दूषित होने से बचाना है। इसके बाद भी लालजीवाला में वन गुर्जरों ने डेरा डाला हुआ है। गुर्जरों की भैंसें हरकी पैड़ी के अपस्ट्रीम में गंगा घाट पर गंगा को मैला कर रही हैं। विभाग एनजीटी के आदेश के नाम पर छोटे-मोटा रेहड़ी, ठेला लगाकर आजीविका जुटाने वालों को खदेड़ता रहता है। बैरागी कैंप जो राजस्व अभिलेखों में गंगा की भूमि है, उसकी तरफ तो विभाग ने झांकना भी छोड़ दिया है। लगातार राजनीतिक संरक्षण में मेला भूमि पर निर्माण और कब्जे किए जा रहे हैं। मेला भूमि पर किए जा रहे अवैध निर्माणों की ओर से एचआरडीए ने भी मुंह फेर रखा है।
सप्तसरोवर में सिंचाई विभाग केे कुंभ मेला के एक प्लाट में अवैध निर्माण की जानकारी मिलने पर जिलेदार व अन्य कर्मचारियों को भेजकर जांच कराई गई है। एक पट्टेदार की ओर से निर्माण कराया जा रहा है। मौके पर गए कर्मचारियों से लिखित जांच रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। पट्टेदार के खिलाफ न्यायालय में बेदखली वाद भी विचाराधीन है। इसलिए सुनवाई के समय न्यायालय के संज्ञान में भी मामला लाया जाएगा। अवैध निर्माण करने वाले ने पहले कर्मचारी पर हमला किया था तब भी उसके खिलाफ तहरीर दी गई थी, लेकिन तहरीर देने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
- एनएस कुंडरा उप राजस्व अधिकारी सिंचाई खंड हरिद्वार