हरिद्वार। इस महीने आकाश में एक दुुर्लभ खगोलीय घटना होने जा रही है। पिछली तीन शताब्दियों में ऐसा कोई अन्य उदाहरण नहीं मिलता। एक ही महीने में दो सूर्यग्रहण और एक चंद्रग्रहण एक के बाद एक पड़ेंगे। खास बात यह है कि सौर मंडल के प्रमुख ग्रह बुध, मंगल, शनि और गुरु एक साथ वक्री हो गए हैं। जिस तिथि से यह घटना शुरू होगी उस तिथि को गुप्त नवरात्र भी प्रारंभ हो जाएंगे।
प्राय: एक महीने में दो ग्रहण ही पड़ते हैं। संसार में कहीं भी सूर्यग्रहण हो उसके तत्काल बाद चंद्रग्रहण आता है। इस बार तीन ग्रहणों का दुर्लभ योग पड़ रहा है। भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि तीन ग्रहण के बाद चार ग्रहों का वक्री होना अनेक संकेत दे रहा है। ऐसे समय में मंगल और केतु की युति शनि और सूर्य की प्रति युति के साथ हो रही है। पहला ग्रहण 13 जुलाई को सूर्यग्रहण के रूप में पड़ेगा। यह ग्रहण भारत में दिखायी नहीं देगा, लेकिन कई राशियों पर बुरा प्रभाव डालेगा। न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया आदि देशों में यह ग्रहण कर्क राशियों पर भारी पड़ेगा। इसके बाद 27 जुलाई की रात्रि में खग्रास चंद्रग्रहण होगा जो भारत में 2.55 घंटे दिखाई देगा। यह ग्रहण मकर राशि पर भारी पड़ने वाला है। इस ग्रहण के ठीक बाद 11 अगस्त को सूर्यग्रहण एक बार फिर से पड़ेगा। यह ग्रहण भी भारत में दिखायी नहीं देगा, लेकिन अमेरिका और उत्तरी यूरोप में यह ग्रहण भारी प्रभाव डालेगा। यह ग्रहण कर्क राशि वालों को परेशान करेगा। डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार दुर्लभ आकाशीय घटनाओं के कारण आने वाले समय में प्राकृतिक बाधाओं की बाढ़ आ जाएगी। ऐसे समय में 13 जुलाई से ही गुप्त नवरात्र का पड़ना भी विशेष माना जा रहा है।
चंद्रग्रहण भारत में इतना लंबा कम ही पड़ता है। यह खग्रास चंद्रग्रहण देश में हर जगह दिखाई देगा। चंद्रग्रहण के कारण समुद्रों में भी तूफान आ सकता है। पितृदोष निवारण के लिए ग्रहों की वक्र स्थिति काफी अशुभ कार्य है। 10 जुलाई को गुरु यद्यपि मार्गी हो जाएंगे, लेकिन वे वातावरण पर उसी प्रकार डालते रहेंगे। तीन ग्रहण एक साथ पड़ने की कोई घटना पिछली शताब्दियों के पंचांगों में नहीं मिलती। इन ग्रहणों का अध्ययन ब्रह्मांड को जानने के लिए भी विशेष लाभकारी होगा।