अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। सड़कों का ठीक से रखरखाव नहीं करने और पुश्तों की मजबूती पर ध्यान नहीं देने से बस हादसों को रोकने की बात करना बेमानी है। यह बात हरिद्वार के खड़खड़ी स्थित श्मशान घाट पर मैरी गांव के नौ लोगों के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए लोगों ने कहे। उन्होंने कहा कि हादसे से सबक लेने की जरूरत है। सोमवार को अंतिम संस्कार के बाद वे सभी लोग पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के आश्रम प्रेमनगर में ठहरे थे।
मैरी गांव निवासी शिशुपाल सिंह रावत ने कहा कि सुंगडी गदेरे के ऊपर बनी सड़क बेहद कमजोर है। वहां मिट्टी के कटाव रोकने के लिए बनाए गए पुश्ते ही नींव ही नहीं है। पुश्ते के नीचे से मिट्टी निकल चुकी थी और बस का दवाब नहीं थाम सकी। उनका कहना है कि क्षेत्र में सरकारी बसों का संचालन किया जाना चाहिए। इस मौके पर कुलदीप रावत, अनुज पटवाल, मनोज पटवाल, गोविंद सिंह बिष्ट, सुतेंद्र सिंह रावत, भजन सिंह रावत, ठेकेदार गोविंद बिष्ट, महेंद्र प्रताप बिष्ट, जसवीर बिष्ट, जसपाल बिष्ट, देवेंद्र सिंह रावत, महीपाल सिंह गुसाई, महेंद्र सिंह कंडारी, जसवंत, दिनकर रावत, गबर सिंह आदि शामिल थे।
मृतकों को श्रद्धांजलि दी
हरिद्वार। धुमाकोट बस हादसे में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए तीर्थ पुरोहितों ने दो मिनट का मौन रखते हुए श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर पं. मायाराम, महेश वशिष्ठ, उमाकांत वशिष्ठ, हरिओम शर्मा जैकल, शिवकुमार कौशिक, अंकित, निकुंज खेवड़िया आदि शामिल हुए। चिह्नित राज्य आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष जेपी पांडे सहित रामकुमार शर्मा, रश्मि पटवाल, पिंकी नेगी, महेंद्र कंडारी, रघुवीर बिष्ट, इंद्रमोहन बर्थ्डवाल, यशवंत सिंह रावत, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति के सतीश जोशी, जगत सिंह रावत, एसएस रावत, अजब सिंह चौहान, सरोजनी जोशी, शांति मनोड़ी, देवेश्वरी, तेज सिंह रावत ने भी श्रद्धांजलि दी।