अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। स्वामी रामदेव की पतंजलि योगपीठ शीघ्र योग की तरह संस्कृत के क्षेत्र में भी काम करने वाली है। उत्तराखंड में यह काम शुरू करने के बाद देवभाषा संस्कृत को देशभर में विस्तार दिया जाएगा। इस कार्य के लिए पतंजलि विश्वविद्यालय कई योजनाएं बना रहा हैं। पतंजलि अनुसंधान इकाई भी इस क्षेत्र में योगदान देगी।
18 वर्ष पहले स्वामी रामदेव ने दिव्य योग मंदिर कनखल से निकलकर विश्व भर में योग क्रांति फैलाई। अब भारतीय ग्रंथों का विस्तृत ज्ञान के लिए संस्कृत भाषा के विस्तार की योजना है। स्वामी रामदेव चाहते हैं कि हिंदी और अंग्रेजी के साथ संस्कृत को भी जोड़कर त्रिसूत्री फार्मूला तैयार किया जाए। इन दिनों विश्वविद्यालय और पतंजलि अनुसंधान केंद्र में संस्कृत क्षेत्र का विस्तार से काम हो रहा है। वैदिक संस्कृत ग्रंथों के माध्यम से वैदिक सूत्रों को खोजकर निकाला जा रहा है। इन सूत्रों के आधार पर नए-नए अनुसंधान किए जा रहे हैं, ताकि आधुनिक युग में भी प्राचीन ज्ञान का उपयोग उसी भांति हो सके। हाल ही में पतंजलि विश्वविद्यालय ने उत्तराखंड में संस्कृत के विस्तार की योजना तैयार की है। इस संबंध में प्रदेश के सभी उच्च अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री के साथ संयुक्त वार्ता हो चुकी हैं। संस्कृत भाषा को विस्तार देने का कार्यक्रम बनाया गया है। इस कार्यक्रम को संस्कृत शिक्षा केंद्रों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। ऐसा ही कार्य देश के कुछ अन्य राज्यों में भी शुरू करने की योजना है।
पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने इस संबंध में बताया कि पतंजलि योगपीठ के कारण योग और आयुर्वेद देश देशांतर में फैल गए हैं। उसी तर्ज पर संस्कृत के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। देश में यद्यपि संस्कृत के उत्थान में कई विश्वविद्यालय लगे हुए हैं। पतंजलि विश्वविद्यालय त्रिभाषा सूत्र के आधार पर संस्कृत का विस्तार करेगा। आचार्य ने बताया कि संस्कृत जाने बगैर वेद, पुराण, उपनिषद तथा अनेक प्राचीन ग्रंथ व्यर्थ हैं। दुर्भाग्य से शिक्षा नीति बनाते समय संस्कृत के उत्थान हेतु कोई कदम नहीं उठाया गया है। अब पतंजलि इस क्षेत्र में अपना योगदान देगी।