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हरीश रावत की प्रेसवार्ता

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हरिद्वार।
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार हार के डर से लोकतंत्र की हत्या कर निकाय चुनावों को आगे खिसका रही है। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि संवैधानिक तौर पर राज्य सरकार को निर्देश दें कि आयोग से बातचीत कर निर्धारित समय में चुनाव कराएं।
शुक्रवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य में नगर निकाय चुनावों से लेकर दलित उत्पीड़न पर भाजपा सरकारों को घेरा। उन्होंने कहा कि बड़ी हास्यास्पद बात है कि निकाय चुनाव के लिए सरकार के प्रवक्ता को मुख्यमंत्री ने नवंबर महीने से मिलने का समय नहीं दिया और समय अवधि में मुलाकात तक नहीं हो सकी। चुनाव के लिए मुख्यमंत्री का समय न देना संवैधानिक हनन है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार हार के डर से चुनाव को टालने के लिए आरक्षण और सीमांकन का बहाना बनाना चाहती है। उन्होंने दलित उत्पीड़न पर भाजपा की सरकारों को घेरते हुए कहा कि केंद्र सरकार संविधान का अवमूल्यन कर रही है। भाजपा शासित राज्यों में संविधान निर्माता डा. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा मानसिक तौर पर आरक्षण को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। भाजपा की फ्रेंचायजी आरएसएस के नेताओं का आरक्षण पर बयान और सवाल उठाने से साबित हो चुका है कि लोग संविधान बदलने का काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दलितों के प्रति उदासीनता दिखाई तो देश के हालात गंभीर दिखाई पड़े। उन्होंने कहा कि दलितों के आंदोलन के बाद फिर से उत्पीड़न काम शुरू हो गया है। इस मौके पर सतपाल ब्रह्मचारी, पूर्व शहर अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा, धर्मेंद्र प्रधान, सुशील राठी, डा. संतोष चौहान, राव आफाक अली आदि मौजूद थे।
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14 को मौन रखेंगे कांग्रेसी
उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में दलितों का उत्पीड़न बढ़ा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि संविधान पर विश्वास करने वाले लोग सड़क पर उतर गए। उन्होंने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि सरकारी हिंसा चिंता का विषय है, कमजोर का गुस्सा समझा जा सकता है, सत्ता का गुस्सा बर्दाश्त नहीं। उन्होंने कहा कि अब सरकार दलित आंदोलन को कमजोर करने के लिए मुकदमे दर्जकर निर्दोषों को गिरफ्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि 14 अप्रैल को डा. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर कांग्रेस कार्यकर्ता अपने-अपने इलाकों में अंबेडकर की प्रतिमा के सामने मौन रहकर दलितों के मौलिक अधिकारों को बचाने के लिए दुआ मांगेंगे।
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