अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
चार वर्ष बाद जब भी पुरुषोत्तम मास आता है, तब प्रत्येक मंगलवार को हनुमान की पूजा का महत्व बढ़ जाता है। यह परंपरा आरंभ में मध्य और दक्षिण भारत से शुरू हुई थी, अब पूरे देश में फैलती जा रही है। प्रयाग में जहां बड़े हुनमान मौजूद हैं, वहां अधिक मास में सभी मंगलवारों को हनुमान मंदिरों में मेले लगते हैं। उत्तर भारत में यह पर्व अब श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है।
पुरुषोत्तम मास के दो महीने चलने से रविवार से शनिवार तक सभी दिन आठ या नौ वार पड़ते हैं। इस वर्ष ज्येष्ठ में नौ मंगलवार पड़ेंगे। जब भी ऐसा होता है, उसे बड़े हनुमान की पूजा कहा जाता है। ज्येष्ठ का महीना एक मई को प्रारंभ हो चुका है, और 28 जून को समाप्त होगा। इन दो महीनों में भले ही अन्य कोई पर्व न पड़े, किंतु मंगलवार के दिन विशेष रूप से मनाए जाते हैं। गंगा दशहरे का पर्व भी ऐसा अकेला पर्व है, जो इस महीने मानया जाएगा। पुरुषोत्तम मास आने वाली प्रतिपदा को 16 मई के लिए शुरू हो जाएगा। पहला मंगलवार 22 मई को पड़ेगा, जिसे बड़े पर्व के रूप में मनाया जाएगा। पुरुषोत्तम मास का समापन 13 जून को होगा, जबकि ज्येष्ठ के दो महीन 28 जून को समाप्त होंगे। अंतिम बड़ा मंगलवार 26 जून को पड़ेगा। उस दिन मंगल वक्री होने से इस दिन कष्ट निवारण योग का अनुष्ठान भी कराया जाएगा। पुरुषोत्तम मास के सभी 30 दिनों में तीर्थों पर मेले भरते हैं।
पुरुषोत्तम मास प्रत्येक चौथे वर्ष आता है। जिसकी प्रतीक्षा श्रद्धालु द्वारा संवत के शुरू होने पर की जाती है। जिस महीने में पुरुषोत्तम मास पड़ता है, उसी महीने दिनों की संख्या आठ से नौ हो जाती है। यदि किसी महीने मंगल वक्री हो रहा हो, तो उस पुरुषोत्तम मास का महत्व भी बढ़ जाता है। ज्येष्ठ के महीने में गंगा अवतरण दिवस विशेष पुण्यदायी इस लिए भी बन जाएगा। चूंकि वह पुरुषोत्तम मास में पड़ रहा है।