हरिद्वार। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन के अफसरों की लापरवाही विभाग भारी पड़ रही है। उपभोक्ता फोरम के ज्यादातर मामलों में विभाग को न सिर्फ हार का सामना करना पड़ रहा है वही विभाग को वित्तीय चपत भी लग रही है।
आंकड़ों पर नजर डाले तो हरिद्वार उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच में साल 2017 में फरवरी से लेकर दिसंबर तक कुल 98 मामले दर्ज कराए गए। इन तमाम प्रकरणों में से 66 मामलों में यूपीसीएल को हार का सामना करना पड़ा। जबकि चार मामलों में फैसला ही नहीं हो पाया। उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच में जो मामले दर्ज कराए गए उसमें से ज्यादातर नए कनेक्शन लेनेे, गलत बिल, मीटर की खराबी से जुड़े थे। हरिद्वार उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच में 2017 के सुनवाई व समीक्षा के बाद मंच के न्यायिक सदस्यों नरेश जैन, तकनीकी सदस्य नरेंद्र कुमार जोशी और उपभोक्ता सदस्य सुभाष चंद्र भट्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ के 66 मामलों में उपभोक्ताओं के पक्ष मेें फैसला सुनाया। मंच के तकनीकी सदस्य नरेंद्र कुमार जोशी ने बताया कि अधिकतर मामलों में विभागीय अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही देखने को मिली है। उपभोक्ताओं की शिकायत का यदि प्रारंभिक स्तर पर भी निवारण कर दिया जाए तो मामला अदालत तक पहुंचे ही नही। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से दायित्वों का निवर्हन ठीक से नही करने की वजह से उपभोक्ता शिकायत फोरम में आ जाते हैं।