ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
शांतिकुंज प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि यह परिवर्तन की बेला है। नवरात्र के इन दिनों में देवी मां की आराधना से विचारों में सकारात्मक बदलाव आता है। डॉ. पंड्या नवरात्र साधना के सातवें दिन शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित सत्संग को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. पंड्या ने कहा कि मनोयोगपूर्वक की गई नवरात्र साधना से साधक के जीवन में भगवत्सत्ता अवतरित होने लगती है। अर्थात भगवान साधक के जीवन को ऊर्ध्वगामी बनाने के कई रास्ते खोलते हैं। परिवर्तन की इस बेला में ईश्वरीय सत्ता अनुदान बरसाते हैं। साथ ही मनोयोगपूर्वक साधनारत साधकों में वैचारिक परिवर्तन भी करते हैं। उनमें रजोगुण और तमोगुण में सामंजस्य बिठाते हुए सतोगुणों की वृद्धि करते हैं। रामचरित मानस के विभिन्न चौपाइयों के माध्यम से श्रीराम की मर्यादाओं का बखान करते हुए डॉ. पंड्या ने भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित आदर्श को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने तप साधना से विशिष्ट शक्तियां अर्जित किए, जिससे सम्पूर्ण समाज को रावण जैसे अत्याचारियों और असुरों से मुक्त करा पाये। उन्होंने कहा कि मन और विचारों में पनप रहे कुविचारों को दूर करने के लिए गायत्री महामंत्र की साधना के साथ श्रेष्ठ साहित्य का नियमित अध्ययन आवश्यक है। गायत्री परिवार के जनक पूज्य आचार्यश्री ने ऐसे तीन हजार से अधिक साहित्यों की रचना की है, जिसके अध्ययन से साधक पाठक में वैचारिक क्षमता कई गुणा बढ़ता है। उन्होंने कहा कि हमारे वेद, पुराण, स्मृति, आरण्यक तथा आर्ष वांगमय आदि जैसै पौराणिक भारतीय ग्रंथों के माध्यम से विश्वभर में भारतवर्ष वैचारिक दृष्टि से सबसे ऊपर हैं। शांतिकुंज के संगीत विभाग के सदस्यों ने सुगम संगीतमय प्रस्तुति दी। मंच संचालन नमोनारायण पांडेय ने किया। भारत सहित अमेरिका आर यूक्रेन आदि देशों से नवरात्र साधना करने आए साधक उपस्थित रहे।