नगर निगम घर-घर से कूड़ा उठाने वाली केआरएल कंपनी का विकल्प तलाश रहा है। कंपनी के काम की जांच भी कराई जा रही है, जिसकी रिपोर्ट एक-दो दिन में आएगी।
प्रभारी नगर आयुक्त नुपूर वर्मा ने शनिवार को पत्रकारों भी इसकी जानकारी दी है। यह बात भी सामने आई है कि नगर निगम का केआरएल के जिस मालिक के साथ वर्ष 2012 मेें अनुबंध हुआ था। वह लगभग दो साल से अन्य लोग केआरएल के जिम्मेदार बनकर सामने आ रहे हैं। निगम के साथ अनुबंध पर कोलकाता के पीयूष लखोटिया ने हस्ताक्षर किया था। इसलिए अब विभाग उसी से बातचीत करेगा। केआरएल के कामकाज को लेकर सभी क्षेत्र के लोगों में रोष है।
आरोप है कि कंपनी का एक भी काम नियम के अनुसार नहीं किया जा रहा है। आमजन समेत महापौर और पार्षद तक केआरएल के खिलाफ हैं। नगर निगम के अधिकारी भी उसके काम से संतुष्ट नहीं हैं। इसलिए अब उसके विकल्प पर विचार किया जा रहा है। निगम के अधिकारी विकल्प के तौर पर मोहल्ला स्वच्छता समितियों के गठन पर हो रहा विचार कर रहे हैं। ताकि नोटिस की अवधि तक समितियां काम संभाल लें और केआरएल को कार्यमुक्त करना आसान हो जाए।
प्रभारी नगर आयुक्त नुपूर वर्मा ने बताया कि केआरएल के अनुबंध में विवाद की स्थिति में आरबीट्रेशन (पंचाट) का भी प्रावधान है। आरबीट्रेशन में एक माह लगेगा और तब तक स्वच्छता समितियों का गठन कर सफाई व्यवस्था भी शुरू कराई जा सकती है। केआरएल की असफलता का कारण कंपोस्टिंग प्लांट नहीं चला पाना है। इसलिए ट्रंचिंग ग्राउंड में कूड़े का अंबार है। वर्ष 2016 तक का कूड़ा अभी सड़ रहा है। लैंडफिल की व्यवस्था भी अब तक शुरू नहीं हो पाई है।