आजकल वह अपने गांव में छुट्टियां बिता रहे हैं। पढ़ाई के साथ उनकी रुचि लेखन में भी है। उन्होंने बताया कि वे हारमोनियम और तबला वादन के भी शौकीन हैं। उनकी एक पुस्तक द कांप्रेहैंसिव स्टडी ऑफ उत्तराखंड प्रकाशित होने वाली है।
वह एलआईसी में सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर काम करने के साथ ही विजया बैंक में लिपिक के रूप में भी नौकरी का चुके हैं। उनके बड़े भाई रमाशंकर कफलिटिया पेट्रोलियम मंत्रालय में चार्टर्ड अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। हिमांशु की पत्नी देहरादून में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं।
हिमांशु का कहना है कि सफलता के लिए कोई शॉर्टकट रास्ता हो ही नहीं सकता। उनका कहना है कि यदि आपको अपना लक्ष्य प्राप्त करना है तो इसी मूल मंत्र के साथ पढ़ाई करके मुकाम हासिल करना चाहिए।
सीएम कर चुके सम्मानित
एक सप्ताह पहले ही गढ़वाल मंडल की स्वर्ण जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हिमांशु को स्वच्छता में बेहतर योगदान के लिए सम्मानित किया था।