ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
योग हरिद्वार की धरती से ही पूरे विश्व के फलक पर पहुंचा। योग को विश्व योग दिवस तक का दर्जा देने की पहली मांग हरिद्वार से ही उठी थी। योग गुरु स्वामी रामदेव और उनके बालसखा आचार्य बालकृष्ण ने योग को आम आदमी तक सीधा पहुंचाने में तो योगदान दिया ही साथ ही विश्व योग दिवस का दर्जा दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पैैैरवी ने इस कार्य में और ज्यादा अहम योगदान किया। धर्म नगरी की जनता शुक्रवार को 100 से ज्यादा स्थानों पर योग दिवस समारोह का आयोजन कर इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में शिरकत करेगी।
हरिद्वार से योग का पुराना नाता है। शैक्षिक पाठ्यक्रमों में जहां गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ने सबसे पहले योग को शामिल कर योग योग के शैक्षिक मान्यता पर मुहर लगाई वहीं कनखल स्थित योगाभ्यास आश्रम सहित कई ऐसी संस्थाएं हैं जो लंबे समय से योग को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहे हैं। स्वामी रामदेव और उनके बाल सखा आचार्य बालकृष्ण ने योग को जन जन तक पहुंचाने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 90 के दशक में कनखल स्थित दिव्य प्रेम मंदिर के परिसर में जो अलख स्वामी रामदेव ने अपने गुरु स्वामी शंकरदेव के निर्देशन में जलाई थी उसे आगे बढ़ाते हुए सबसे पहला शिविर ज्वालापुर के पांडेवाला में लगाया गया था। इस शिविर में हजारों लोगों ने शिरकत की थी। यहां से शुरू हुई स्वामी रामदेव की मुहिम देश और विदेश तक जा पहुंची। स्वामी रामदेव ने केवल हरिद्वार ही नहीं देश के हर छोटे-बड़े शहर में सीधे जनता से जोड़ते हुए योग शिविर लगाए और इसका यह परिणाम हुआ कि कभी ऋषि मुनियों तक ही सीमित यह विधा हर खास और आम व्यक्ति के लिए स्वस्थ जीवन जीने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई। पतंजलि योगपीठ के आचार्य महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि योग के माध्यम से ही एक दिन भारत विश्व गुरु बनेगा।