ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
गंगा की रक्षा के लिए अपना र्स्वस्व बलिदान करने वाले मातृ सदन के ब्रह्मचारी स्वामी निगमानंद का बलिदान दिवस समारोह बृहस्पतिवार से प्रारंभ हुआ। पहले दिन दिवंगत युवा ब्रह्मचारी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए देश भर से जुटे गंगा भक्तों ने सरकारों पर गंगा की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। संकल्प दोहराया कि निगमानंद और स्वामी सानंद का बलिदान व्यर्थ जाने नहीं दिया जाएगा।
मातृसदन कैंपस में स्वामी निगमानंद सरस्वती की समाधि के पास आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि समय समय पर आने वाली अलग अलग दलों की सरकारें गंगा के प्रति गंभीर नहीं रहीं। गंगा की अविरलता को लेकर ब्रह्मचारी निगमानंद और स्वामी सानंद ने बलिदान दिया।
पिछले महीने ही 194 दिन तक अनशन करने के बाद मातृ सदन के एक अन्य ब्रह्मचारी स्वामी आत्मबोधानंद का अनशन समाप्त कराने के लिए नेशनल गंगा मिशन के चेयरमैन खुद हरिद्वार आए थे और भरोसा दिलाया था कि उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से भी भरोसा दिलाया गया था, लेकिन एक माह से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि गंगा के लिए मातृ सदन की लड़ाई लगातार जारी रहेगी। अगर और भी बलिदान देने पड़े तो पीछे नहीं हटा जाएगा।
पर्यावरणविद भरत झुनझुनवाला ने कहा कि स्वामी निगमानंद का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने दिय जाएगा। गंगा के लिए जो भी लड़ाई लड़नी होगी पीछे नहीं हटेंगे। दिल्ली से आए श्रमिक नेता भूपेंद्र रावत और पत्रकार अमित प्रकाश ने गंगा के प्रति सरकार की उदासीनता को चिंताजनक करार दिया। संगोष्ठी में मधु झुनझुनवाला, संजीव चौधरी, दिनेश वालिया, दीपक कोठारी, ब्रह्मचारी दयानंद, ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद, स्वामी यजनानंद, स्वामी पुण्यानंद समेत भगवानदास संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षकों, छात्रों और विभिन्न राज्यों से आए गंगाभक्तों ने भी विचार रखे।