ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
सोमवती अमावस्या का स्नान इस बार पूरे छह योग साथ लेकर आ रहा है। सोमवार को होने वाले स्नान के लिए बाहरी प्रदेशों से श्रद्धालुओं को हरिद्वार पहुंचना शुरू हो गया है।
जब भी कभी सोमवार को अमावस्या पड़ती है उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। खास बात ये है कि इस बार सोमवार को अमावस्या तिथि दोपहर बाद 3.32 बजे तक रहेगी। अमावस्या का आगमन एक दिन पूर्व रविवार को सांय काल चार बजे से कृतिका नक्षत्र में हो जाएगा। सोमवार को प्रमान योग में अमावस्या पड़ेगी। योगों में संयोग यह देखिए कि इस दिन चंद्रमा भी सवेरे से ही रोहिणी नक्षत्र में आ जाएगा। अमावस्या को रोहिणी व्रत ही रखा जाएगा। इसी दिन भगवान शनिदेव की भी जयंती है। इस कारण सोमवती शनैश्चरी बन गई है। इसी दिन वट सावित्री का व्रत रखा जाएगा। देशभर में महिलाएं अपने पतियों को अनिष्ट से बचाने के लिए वट सावित्री व्रत रखेंगी। सोमवती अमावस्या के दिन लाखों महिलाएं पीपल के वृक्षों की परिक्रमा सूत के धागे लपेटते हुए करेंगी। सोमवार को भावुका जयंती भी है, जिसे भावुका अमावस्या कहा जाता है। इस प्रकार भोलेनाथ और चंद्रमा की पूजा के इस दिन छह योग एक साथ पड़ रहे हैं। ऐसा होना प्राय: दुर्लभ माना जाता है। रातभर अमावस्या रहने के कारण सोमवती का स्नान रविवार की अर्द्धरात्रि बारह बजे से प्रारंभ हो जाएगा। इस दिन सर्वमान संयोग भी बना रहेगा। सोमवती अमावस्या का स्नान पर्व अनेक योगों को और संयोगों को लेकर आ रहा है।
हजारों श्रद्धालु करेंगे पितृ तर्पण
हरिद्वार। वर्ष की प्रत्येक अमावस्या को श्राद्ध तर्पण के लिए हजारों लाखों श्रद्धालुओं का आगमन धर्मनगरी में होता आया है। इस बार स्नान और श्राद्ध तर्पण का संयोग भी पड़ रहा है। फलस्वरूप गंगा के कुशावर्त घाट और नारायणी शिला पर हजारों श्रद्धालु सुबह से ही पितरों को विदाई देने लगेंगे। पितरों को जलाजंलि देने के साथ साथ कालसर्प योग निवारण व पितृ शांति के लिए यमयज्ञ कराए जाएंगे।