गुजरात के सूरत शहर में कांपलेक्स में चल रहे कोचिंग सेंटर में आग लगने के बाद हुई 15 से ज्यादा छात्रों की मौत ने शहर और आसपास के इलाकों में नियमों को दरकिनार बनकर बने व्यावसायिक कॉम्पलेक्सों की ओर ध्यान खींचा है। यहां के अधिकांश कोचिंग सेंटर इन कॉम्पलेक्स में संचालित किए जा रहे हैं और यहां आग से बचने के लिए जरूरी इंतजाम नहीं। कई कांपलेक्स तो ऐसे इलाकों में बनाए गए हैं कि वहां दमकल वाहन पहुंच ही नहीं पाएगा। अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नहीं करने पर दमकल विभाग के अधिकारी भी आज तक इन कॉम्पलेक्स मालिकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सके।
शहर और आसपास के इलाकों में करीब 25 बड़े कोचिंग सेंटर हैं। इन कोचिंग सेंटरों में एक साथ सैकड़ों बच्चों को पढ़ाया जाता है। यह सभी कोचिंग सेंटर कॉम्पलेक्सों में संचालित हो रहे हैं। चंद्राचार्य चौक रानीपुर मोड़ क्षेत्र में ही अधिकांश व्यवसायिक कॉम्पलेक्स हैं। इसके अलावा भी शहर के कई अन्य हिस्सों में भी कॉम्पलेक्स बने हुए हैं। कॉम्पलेक्स निर्माण के दौरान इनके मालिकों ने मानकों को दरकिनार किया और जिम्मेदार महकमा भी चुप्पी साधे रहा।
सबसे ज्यादा अनदेखी आग की घटना होने पर उसके सुरक्षा के इंतजामों की हुई। जबकि किसी भी बड़े भवन के निर्माण में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम करना जरूरी होता है। कोचिंग सेंटर के संचालकों ने भी कोई इंतजाम नहीं किया। कॉम्पलेक्सों में सीढ़ियों से एक समय में महज एक ही व्यक्ति आ जा सकता है। खास बात यह है कि इन कॉम्पलेक्सों में कोचिंग सेंटर के अलावा इंश्योरेंस कंपनी के कार्यालय भी खुले हैं। इन कार्यालयों में दिनभर लोगों की भीड़ लगी रहती है।
अतिक्रमण की चपेट में कॉम्पलेक्स
कॉम्पलेक्सों को अतिक्रमण ने पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया है। दुकानदारों ने अपनी अपनी दुकानें कई कई फुट आगे बढ़ा ली है या फिर सामान रखकर आने जाने का रास्ता बेहद ही संकरा कर दिया है। ऐसे में आमजन को बेहद ही दिक्कत से गुजरना पड़ता है।
अग्निश्मन विभाग समय समय पर अग्नि सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा करता रहता है। हाल ही में संपन्न हुए अग्निशमन सुरक्षा सप्ताह के दौरान भी अभियान चलाया गया था। गुजरात में घटी घटना का संज्ञान ले रहे हैं। उच्च अधिकारियों की तरफ से जो भी निर्देश मिलेंगे उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
- राजेंद्र खाती, सीएफओ हरिद्वार