ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। नगर निगम में सम्मिलित नए वार्डों में पार्षदों व अधिकारियों ने बिना किसी पूर्व स्वीकृति के लगभग सौ सफाई कर्मचारी रख लिए हैं। पार्षद दो महीने से इन सफाई कर्मचारियों से सफाई कार्य करा रहे हैं, लेकिन उनका भुगतान नहीं किया गया। अब सफाई कर्मचारी वेतन के लिए नियुक्त करने वाले पार्षदों के घर चक्कर काट रहे हैं।
नगर निगम का गठन होने के दौरान क्षेत्र में सफाई व्यवस्था चरमरा गई थी। पार्षद मनोज व हितेश का कहना है कि नए वार्डों में 5-5 सफाई रखने का निर्णय 28 दिसंबर की बैठक में लिया गया था। मेयर अनीता शर्मा, तत्कालीन नगर आयुक्त डॉ. ललित नारायण मिश्रा और वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कैलाश गुंज्याल ने ही कहा कि वे 5-5 कर्मचारी रख लें। उनके कहने पर कर्मचारी रखे गए हैं और काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने उन कर्मचारियों के आधार कार्ड व बैंक का एकाउंट नंबर भी जमा कराया था। पार्षदों ने मांग उठाई कि कर्मचारियों का भुगतान नगर निगम की ओर से किया जाना चाहिए। शनिवार को हुई बोर्ड बैठक में पार्षदों ने इस विषय को उठाया। मामला सामने आया तो नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने हैरानी जताई। उनका कहना था कि शासन की अनुमति के बिना कोई नई नियुक्ति नहीं की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन्होंने बिना स्वीकृति के कर्मचारी रखें हैं उनके भुगतान की जिम्मेदारी भी उनकी ही है। सूत्रों ने बताया कि अवैध रूप से नियुक्त सफाई कर्मचारियों को कूड़ा उठाने वाली कंपनी केआरएल के मथे मंडा जाएगा।
आउटसोर्स कंपनी नियुक्त करेंगे
शासनादेश के विपरीत कोई नियुक्ति नहीं की जा सकती है। जिस किसी ने भी यह किया है उसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार है। नए वार्डों में सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता तो है इस समस्या के समाधान के लिए आउटसोर्स कंपनी नियुक्त की जाएगी। उसके माध्यम से ही इसका हल निकालने का प्रयास किया जाएगा।
-आलोक कुमार पांडेय नगर आयुक्त
क्षेत्र बढ़ाया है तो सफाई कर्मचारियों की अन्य कर्मचारियों की भी संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, इस बात को पहले दिन से कहा जा रहा है। नए वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए कर्मचारी रखे जाने की बात आई थी, परंतु कर्मचारी रख लिए गए हैं यह उन्हें जानकारी नहीं है। जांच कराई जाएगी कि कर्मचारी रखे भी गए हैं या नहीं और वह कहां काम कर रहे हैं।
-अनीता शर्मा, मेयर