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अब एक महीना विलंब से आएंगे सभी पर्व

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हरिद्वार। पुरुषोत्तम मास के कारण अब सभी पर्व एक-एक महीना विलंब से आएंगे। जुलाई का महीना वर्षा का महीना माना जाता है। यह महीना बीत जाने के बाद 28 जुलाई से विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक पैदल यात्रा कांवड़ यात्रा के रूप में प्रारंभ होगी। देश के सभी शिवालयों में 10 अगस्त को गंगा जल चढ़ाया जाएगा। वर्ष का अंतिम पर्व दीपावली सात नवंबर को मनेगा।
दो महीनों के ज्येष्ठ मास में महीनों का गणित बिगाड़ दिया है। पुरुषोत्तम मास में कोई संक्रांति नहीं थी। अत: सूर्य नारायण डेढ़ महीने से कर्क राशि में ही बने हुए हैं। अब शुद्ध ज्येष्ठ प्रारंभ हुआ है। इसी ज्येष्ठ में सूर्य का राशि परिवर्तन होगा। दो महीने चलने वाला ज्येष्ठ 28 जून को संपन्न होगा और उसी दिन आषाढ़ प्रारंभ हो जाएगा। आषाढ़ का महीना 27 जुलाई को समाप्त होगा, उस दिन गुरु पूर्णिमा का बड़ा पर्व मनाया जाएगा। संयोग से गुरु पूर्णिमा को ही खग्रास चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। आषाढ़ मास में जुलाई बीत जाने के कारण श्रवण मास का शुभारंभ अंतिम दिनों में 28 जुलाई को होगा। कांवड़ यात्रा पूरे 14 दिन चलती है। 14वें दिन 10 अगस्त को देश भर के शिवालयों में गंगा जल से भगवान आशुतोष का अभिषेक होगा। रक्षाबंधन आदि पर्व विलंब से आएंगे। 16 दिनों को श्राद्ध 25 सितंबर से शुरू होगा और नौ अक्तूबर तक चलता रहेगा। शारदीय नवरात्रों का पहला नवरात्र नौ अक्तूबर को शुरू होगा। प्रसिद्ध विजय दशमी दशहरा पर्व 19 अक्तूबर को मनाया जाएगा।
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इस वर्ष एक महीने के लिए अधिमास में विवाह रुके रहे। अब 19 जून से विवाहों का सीजन प्रारंभ हो रहा है। यह सीजन 23 जुलाई तक चलेगा। 23 जुलाई को चार महीनों के लिए हरिशयन हो जाएगा। विष्णु के निद्रा में जाते ही विवाहों पर चार महीनों के लिए विराम लग जाएगा। सात नवंबर को दीपावली के बाद 19 नवंबर को देव जागरण एकादशी आएगी। उस दिन से विवाहों का सीजन एक बार फिर शुरू हो जाएगा। हरिद्वार में वर्ष का अंतिम स्नान पर्व कार्तिक पूर्णिमा के रूप में 23 नवंबर को पड़ रहा है।
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