हरिद्वार।
बड़मावस के अवसर पर देश भर से आए लाखों श्रद्घालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। श्रद्घालुओं ने नारायणी शिला और कुशावर्त पर जाकर पितरों के निमित्त कर्मकांड कराए। शहर में कई स्थानों पर वट वृक्ष की पूजा किी गई।
यह पर्व सावित्री और सत्यवान को समर्पित है। इसी दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से मुक्त कराया था। मंगलवार को सौभाग्यवती महिलाओं ने घरों में व्रत रखकर मां सावित्री की पूजा अर्चना की और बायने निकाले। सावित्री सत्यवान की कथा का श्रवण भी किया गया। श्रद्घालुुओं ने हरकी पैड़ी पर स्नान के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया। यह दिन पितरों के निमित्त भी मनाया जाता है। बड़मावस पर पितरों को दिया हुआ जल सीधे उन्हें प्राप्त होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पितृ स्वयं अपना भाग लेने के लिए धरती पर आते हैं। नारायणी शिला और कुशावर्त घाट पर दिन भर पितृ शांति, नारायणी कर्म, काल सर्प रोग निवारण, पिंडदान, श्राद्घतर्पण आदि किए। यह दिन मोहल्लों और कालोनियों में सार्वजनिक रूप से मनाया जाता है। जहां-जहां वट वृक्ष हैं, वहां अपने पतियों के साथ महिलाओं ने सौभाग्य का सामान चढ़ाया। घरों में मीठे पकवान बनाकर आसपास में वितरित किए। इस दिन महिलाएं घरों में अपने पति के साथ ही भोजन करती हैं। कामदार घरों में रात के समय पर्व संपन्न हुए।
स्नान की सर्वाधिक भीड़ राजस्थान, गुजरात, पंजाब, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र श्रद्धालुओं की थी। इस दिन समीपवर्ती दिल्ली और उत्तर प्रदेश से काफी संख्या में श्रद्घालु पहुंचे। स्नान देर शाम तक चलता रहा। सायंकाल आरती में भी भीड़ उमड़ी।