हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि नियमित रूप से ध्यान करने से धारणा की शक्ति बढ़ती है। ध्यान मन को एकाग्र करने का सर्वोत्तम उपाय है। ध्यान आंतरिक शक्ति को विकसित करता है।
शुक्रवार को शांतिकुंज के मृत्युंजय सभागार में आयोजित ध्यान की विशेष कक्षा को संबोधित करते हुए डॉ. पंड्या ने कहा कि ध्यान के अभ्यास व वैराग्य से ही मन बलवान होता है। यदि मन वश में हो तो वैचारिक ऊर्जा का प्रवाह ऊंचा होगा, इससे इच्छा शक्ति मजबूत होगी और व्यक्ति संकल्पवान बनेगा। उन्होंने कहा कि यदि मनोरोग है तो शरीर का अस्वस्थ होना स्वाभाविक है। दूसरी तरफ शारीरिक व्याधि है तो मन में विषाद होगा, किंतु ध्यान से मन को मजबूत बनाकर और सकारात्मक चिंतन से शारीरिक बीमारी को मात दी जा सकती है। कुलाधिपति ने कहा कि हम ध्यान के साथ जितनी तन्मयता से गायत्री महामंत्र का जप करेंगे, उतना अधिक फायदा हमें मिलेगा। उन्होंने गीता व अन्य पौराणिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए ध्यान की व्यावहारिक व सैद्धांतिक परिभाषाएं बताईं। इस अवसर पर कुलाधिपति ने परीक्षा की तैयारी में जुटे विद्यार्थियों को ध्यान की विधि एवं लाभ विषय पर जानकारी दी। इससे पूर्व कुलाधिपति डॉ. पंड्या ने विद्यार्थियों के विविध शंकाओं का समाधान किया। इस दौरान कुलपति शरद पारधी, कुलसचिव संदीप कुमार सहित समस्त विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर्स और विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।