अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वा।
देश के विभिन्न भागों से आए श्रद्धालु शनिवार को मेष संक्रांति का स्नान करेंगे। एक दिन पहले शुक्रवार को स्नान के लिए पहुंचे यात्रियों ने हरकी पैडी और कुशावर्त घाट जाकर संस्कार संपन्न कराए। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने पर मुख्य स्नान शनिवार को होगा।
बैसाखी के साथ ही सोमवती पड़ने का असर संक्रांति स्नान पर दिखाई पड़ रहा है। सवेरे से काफी कम संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन धर्मनगरी में हुआ। आमतौर से बैसाखी 13 अप्रैल की पड़ती है। जो श्रद्धालु स्नान के लिए आए हैं, उन्होंने गंगा घाटों पर जाकर अनेक संस्कार संपन्न कराए। इन में सर्वाधिक संस्कार यज्ञोपवीत से जुड़े थे। विशेष रूप से भारत में रहने वाले सिंध प्रांत के श्रद्धालु अपने बच्चों और युवकों के यज्ञोपवीत कराने पहुंचे। सिंधी परिवर उपनयन संस्कार को बड़ी मान्यता देते हैं। उनके संस्कार देखते ही बनते हैं। नाच गानों के साथ पूरा संस्कार घाटों पर उसी प्राचीन स्वरूप में संपन्न होता है, जिसका वर्णन संस्कार माला में किया गया है। गढ़वाल मंडल से आए श्रद्धालुुओं ने भी यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराया। कुशावर्त पर इन्हीं दोनों समुदायों की भीड़ दिन भर लगी रही। संस्कार से पहले श्रद्धालुओं ने हरकी पैडी जाकर गंगा स्नान भी किया। इसके के साथ कुशावर्त पर मुंडन और कर्णछेदन संस्कार संपन्न कराए गए। हर की पैडी के नाई घाट पर भी ये संस्कार हुए।
शुक्रवार का दिन धर्मनगरी में फीका दिखाई दिया। शाम से संक्रांति नहाने के लिए तीर्थ यात्रियों का आगमन शुरू हुआ है। दरअसल सोमवती अमावस्या का पर्व पास ही आ जाने से यात्री ठहरकर आ रहे हैं। पंजाब , जम्मू काश्मीर, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से भी यात्रियों का आगमन रविवार को होगा। असली भीड़ रविवार को पहुंचने के आसार हैं। बैसाखी नहाने आए श्रद्धालु भी सोमवती तक रुकेंगे।