अब प्रदूषण फैलाने वाली 132 फैक्ट्रियां एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के निशाने पर होंगी। इससे पहले जीपीआई (ग्रोसी पोल्यूटिंग इंडस्ट्रीज) सूची के तहत आने वाली क्षेत्र की मात्र 25 फैक्ट्रियों को प्रदूषण की रोकथाम के लिए नोटिस जारी किए गए थे।
अब एनजीटी ने प्रदूषण जांच के तहत आने वाली फैक्ट्रियों का दायरा बढ़ाते हुए एसपीआई (सीवअर्ली पोल्यूटिंग इंडस्ट्रीज) सूची जारी की है। एनजीटी के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की ओर से एसपीआई सूची में आने वाली सभी फैक्ट्रियों की जांच करने के आदेश दिए गए हैं।
जिसके तहत पहले चरण में 13 से 16 जुलाई तक फैक्ट्रियों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी। नवंबर 2014 में एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जीपीआई के तहत प्रदूषण फैला रही फैक्ट्रियों की जांच कर रिपोर्ट दिए जाने के आदेश दिए थे।
जिसके तहत जिले में 25 फैक्ट्रियों को रीयल मानीटरिंग सिस्टम लगाने के आदेश जारी किए गए थे। अब एनजीटी ने फैक्ट्रियों पर शिकंजा कड़ा करते हुए दायरा बढ़ा दिया है।
एसपीआई सूची जारी कर अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैला रही फैक्ट्रियों की भी रिपोर्ट मांगी है। इसके तहत जिले में आ रही सभी बड़ी-छोटी 132 फैक्ट्रियों की जांच होनी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा. अंकुर कंसल ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जांच के आदेश दिए गए हैं।
जिसके तहत पहले चरण में 13 से 16 जुलाई तक और दूसरे चरण में 23 से 26 जुलाई तक एसपीआई के तहत आने वाली सभी फैक्ट्रियों की जांच की जाएगी। जिसकी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेजी जाएगी।
इन विभागों के अधिकारी करेंगे जांच
जांच के लिए गठित कमेटी के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पेयजल निगम और उत्तराखंड सरकार की ओर से नामित प्रतिनिधि विशेषज्ञों की ओर से फैक्ट्रियों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
इन फैक्ट्रियों पर कसेगा शिकंजा
जीपीआई सूची के तहत पहले शुगर मिल, शराब फैक्ट्रियां, पेपर बनाने वाली फैक्ट्रियां, सीमेंट फैैक्ट्री, आटोमोबाइल कंपनी, डेयरी उद्योग दायरे में थी। अब निकिल पॉलिश करने वाली फैक्ट्रियां, जूस मेकर फैक्ट्री, आइस फैक्ट्री सहित अन्य छोटी फैक्ट्रियां भी जांच के दायरे में होंगी।