हरिद्वार। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि हरिद्वार के संत सरकार से कुंभ के लिए भूमि की मांग कर रहे हैं, लेकिन संतों के पास अखाड़ों की जो जमीन पहले से ही थी, उस पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर बेच दिया गया है। उन्होंने कहा कि संस्था को पैसों की जरूरत पड़ती है, लेकिन साधु संतों को नहीं। संतों की निजी संपत्ति की जांच कराई जानी चाहिए और आय के श्रोत का भी पता लगाया जाना चाहिए। यदि आयकर के दायरे में संपत्ति आती है तो टैक्स भी वसूला जाना चाहिए।
स्वामी शिवानंद सरस्वती सोमवार को मातृसदन में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म की लड़ाई धर्म से ही लड़ी जाती है, अधर्म से नहीं। हरिद्वार के संत प्रयागराज की तरह कुंभ को भव्य बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन चकाचौंध की भव्यता से कुंभ का कोई वास्ता नहीं है। कुंभ की भव्यता आध्यात्मिकता के आधार पर होनी चाहिए। हरिद्वार में खनन पर रोक लगाने के लिए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) ने कई बार जिलाधिकारी को आदेश दिए, लेकिन उनका पालन नहीं किया गया। 19 अप्रैल को मातृसदन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, जिसकी एक प्रति एनएमसीजी को भी भेजी गई थी। इसके बाद एनएमसीजी ने 26 अप्रैल को हरिद्वार के जिलाधिकारी को फिर से आदेश देकर एक मई तक बीते छह माह में अवैध खनन पर की गई कार्रवाई और धरातल पर उसके असर की रिपोर्ट देने के लिए कहा है। साथ ही अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने, औचक निरीक्षण कर अवैध खनन को रोकने, पुलिस को खनन से संबंधी अवैध सामग्री को सीज करने के निर्देश देने सहित कई अन्य आदेश दिए हैं।
एक ब्लॉग में छपा संत गोपालदास का साक्षात्कार
स्वामी शिवानंद ने कहा कि कई महीनों से लापता चल रहे संत गोपालदास का पता चल चुका है। एक वरिष्ठ पत्रकार ने अपने ब्लॉग में उनका साक्षात्कार लिया है। इसमें संत गोपालदास ने शासन प्रशासन की प्रताड़नाओं को बताया है। उधर, गंगा की रक्षा के लिए ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को अनशन 187वें दिन भी जारी रहा। सोमवार को उनका वजन केवल 47 किलो था।