अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। राजाजी टाइगर रिजर्व के 17 वनकर्मियों के इस्तीफा प्रकरण में सोमवार को देहरादून में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों से वार्ता की। इस दौरान अधिकारियों ने गुलदार प्रकरण में रेंजर सहित वनकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज न करने की बात कही।
बीती 22 मार्च को राजाजी टाइगर रिजर्व में गुलदार की मांस, खास और हड्डी मिलने का प्रकरण सामने आया था। जिसमें कई अधिकारियों द्वारा जांच की गई। जांच में सामने आया कि कोर्ट में पेश करने से पहले सील तोड़कर कर मांस के साथ छेड़छाड़ की गई है। जांच के दौरान बयानों में विरोधाभास होने पर रेंजर, वन दरोगा और वनकर्मी को हटाने की संस्तुति की गई। जिसके बाद रेंजर अनूप गुसाईं को उनके पद से हटाते हुए वन संरक्षक यमुना वृत्त कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। जबकि वन दरोगा अशोक सिंह व वनकर्मी प्रवेश कुमार को मुख्य वन संरक्षक अनुश्रवण एवं मूल्यांकन, ऑडिट कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
विभाग द्वारा रेंजर, वन दरोगा और वनकर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने सहित आगे की कार्रवाई करने की अनुमति मांगी गई थी। जिसके बाद सभी संगठनों ने लामबंद होकर आंदोलन का बिगुल फूंकने की चेतावनी दे दी। सहायक वन कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष इंद्रमोहन कोठारी और वन बीट अधिकारी व वन आरक्षी संघ के प्रदेश अध्यक्ष आशीष कोठारी ने बताया कि सोमवार को उच्चाधिकारियों के साथ वार्ता की गई। जिसमें उन्होंने रेंजर, वन दरोगा और वनकर्मी पर मुकदमा दर्ज न करने पर संस्तुति दी। वार्ता में यह बात सामने आई कि जांच में पारदर्शिता लाने के लिए आरोपियों को उनके पद से हटाया गया है। इंद्रमोहन कोठारी ने बताया कि उच्चाधिकारियों ने शिवालिक कंजरवेटर ने पास जाने के सलाह दी है। साथ ही उन्होंने दोषी पाए जाने पर एसडीओ पीसी शर्मा को तत्काल प्रभाव से हटाने का आश्वासन दिया।