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संस्कत नाटक और लघुकथा लेखन में डॉ. प्रकाश पंत प्रथम

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हरिद्वार।
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से 2017 में आयोजित की गई अखिल भारतीय संस्कृत लघु नाटक और लघु कथा लेखन प्रतियोगिता में उत्तराखंड संस्कृत विवि के सहायक प्रोफेसर डा. प्रकाश पंत ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। वहीं संस्कृत पद्यपूर्ति लेखन प्रतियोगिता में भी संस्कृत विवि के सहायक प्रोफेसर डा. शैलेश तिवारी ने प्रथम स्थान प्राप्त कर संस्कृत विवि का सम्मान बढ़ाया है।
शुक्रवार को उत्तराखंड संस्कृत अकादमी में आयोजित सम्मान समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्य अतिथि संस्कृत विवि के कुलसचिव गिरशी कुमार अवस्थी, अकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी ने नगद पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। अकादमी के सचिव गिरधर सिंह ने बताया कि अखिल भारतीय नाटक लेखन प्रतियोगिता में प्रथम डा. प्रकाश पंत, द्वितीय डा. शैलेश कुमार, तृतीय परमानंद शर्मा, संस्कृत लघुकथा लेखन प्रतियोगिता में प्रथम डा. प्रकाश पंत, द्वितीय शारदा रमेश, तृतीय हेमचंद्र बेलवाल और पद्यपूर्ति लेखन प्रतियोगिता में डा. शैलेश तिवारी प्रथम, विश्वनाथ घनश्याम जोशी द्वितीय, पंकज तृतीय स्थान पर रहे। संस्कृत छात्र सम्मान के अंतर्गत उत्तराखंड माध्यमिक बोर्ड में प्रथम लेबा मंसूरी, द्वितीय हिमानी, तृतीय खुशी कंबोज, इंटरमीडिएट में प्रथम किरन, द्वितीय पूजा, तृतीय प्रवेश नौटियाल रहे। वहीं संस्कृत परिषद के अंतर्गत पूर्वमध्यमा कक्षा में प्रथम व्रजेश जोशी, द्वितीय शुभम नैलवाल, तृतीय भूपेश तिवारी, उत्तरमाध्यमा कक्षा में प्रथम केवल जोशी, द्वितीय आशीष कंसवाल, तृतीय किशन चंद्र सुयाल रहे।
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संस्कारों को देने वाली है संस्कृत भाषा
हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने कहा कि संस्कृत भाषा आचार-विचार और संस्कारों को देने वाली भाषा है। संस्कृत पढ़ने वाले ही समाज को नई दिशा और दशा प्रदान कर सकते हैं। संस्कृत में समाज के विकास की अनेक संभावनाएं है।
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उत्तराखंड संस्कृत अकादमी में आयोजित अखिल भारतीय लेखन सम्मान, संस्कृत छात्र सम्मान के पुरस्कार वितरण समारोह और एक दिससीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि गिरीश कुमार अवस्थी ने कहा कि संस्कृत के संरक्षण और विकास के लिए हमे सबको आगे आना होगा। मुख्य वक्ता प्राच्य विद्या शोध संस्थान मध्यप्रदेश के निदेशक डा. सुद्यम्न आचार्य ने कहा कि सृष्टि के आरंभ से ही विज्ञान का प्रादुर्भाव हुआ है। हमारे वेद, उपनिषद और पुराण आदि गंथ विज्ञान के स्रोत है। अकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी ने कहा कि संस्कृत विश्व को दिशा और दशा देने वाली भाषा है। इसके संरक्षण से हम ज्ञान विज्ञान का वर्धन और शांति स्थापित कर सकते हैं। संचालन डा. सीएसआर लिंगारेड्डी ने किया। इस अवसर पर किशोरी लाल रतूड़ी, डा. इंद्रेश पथिक, डा. हरीशचंद्र गुरुरानी, डा. रामरतन खंडेलवाल, प्रकाश चंद्र पांडेय, डा. रत्नलाल, डा. अरुण मिश्र आदि मौजूद थे।
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