अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। संत शिरोमणी गोस्वामी तुलसीदास महाराज की 521वीं जयंती पर तुलसीचौक से रामानंद आश्रम तक शोभायात्रा का आयोजन किया गया। बाद में हुए संत समागम में अध्यक्षीय संबोधन करते हुए बाबा हठयोगी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के महान कवि थे। उन्हें रामायण के रचियता महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन का वर्णन कर संपूर्ण समाज को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास को प्रभु श्रीराम का स्वरूप अत्यंत प्रिय था। उनकी बुद्धि, राग, कल्पना और भावुकता पर राम की मर्यादा और लीला का आधिपत्य था। महंत विष्णुदास महाराज ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिभा किरणों से न केवल हिंदू समाज और भारत बल्कि समस्त संसार आलोकित हुआ। उन्होंने अपनी रचनाओं से समाज को जागृत कर नई दिशा दी। महामंडलेश्वर डा.श्याम सुंदरदास शास्त्री महाराज ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने अपनी विद्वता से प्रभु श्रीराम के वास्तविक एवं तात्विक रूप से समाज को परिचित कराया और संपूर्ण विश्व को सद्मार्ग की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया।
रामानंद आश्रम के महंत प्रेमदास महाराज ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास महान कवि होने के साथ दार्शनिक भी थे। उन्होंने कई तीर्थस्थलों पर जाकर भगवान राम की खोज कर अपने मन को आध्यात्मिकता की ओर लगाया। इस अवसर पर महंत रामलखन दास महाराज ने कार्यक्रम में पधारे सभी संत महापुरुषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में महंत रघुवीर दास, महंत दुर्गादास, महंत दिनेश दास, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी संतोषानंद देव, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, संत जगजीत सिंह, संत मंजीत सिंह आदि उपस्थित रहे।