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पानी में हिस्सेदारी को तैयार नहीं उतर प्रदेश

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हरिद्वार। गंगा के पानी में उत्तराखंड को हिस्सेदारी देने के लिए उत्तर प्रदेश तैयार नहीं है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने अपनी बढ़ती आवश्यकताओं को गिनाते हुए उत्तराखंड को अतिरिक्त पानी देने से साफ मना कर दिया है।
हाल में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर मेरठ और हरिद्वार में दो बैठकें हो चुकी हैं। परिसंपत्तियों में उत्तर प्रदेश 75 प्रतिशत अपने पास रखने पर अडंा हुआ है और केवल 25 प्रतिशत ही उत्तराखंड को देना चाहता है। 25 प्रतिशत में भी ऐसी संपत्ति देना चाहता है जो नदी-नालों और अवैध कब्जों की विवादित चली आ रही हैं। उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने हरिद्वार के किसानों की सिंचाई आवश्यकता के लिए 665 क्यूसेक अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव पहले 19 मई को मेरठ की बैठक और फिर 11 जून को भीमगोडा बैराज स्थित अलकनंदा गेस्ट हाउस में हुई दूसरी बैठक में रखा था। उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने अपनी प्रस्तावित इकबालपुर नहर योजना के लिए 525 क्यूसेक पानी और जगजीतपुर एवं कनखल नहर की क्षमता वृद्धि के लिए 140 क्यूसेक कुल 665 क्यूसेक अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने की मांग की थी। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने अपनी बढ़ती आवश्यकताओं को गिनाते हुए उत्तराखंड को अतिरिक्त पानी देने से साफ मना कर दिया है। उत्तराखंड के अधिकारियों के अनुरोध पर पानी में हिस्सेदारी का मसला दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की मध्यस्थता के लिए छोड़ दिया गया है।
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आवासीय संपत्तियों पर समिति लेगी निर्णय
दोनों राज्यों के बीच आवासीय परिसंपत्तियों को स्थिति और बंटवारे का प्रपोजल प्रस्तुत करने के लिए सिंचाई खंड हरिद्वार के उप राजस्व अधिकारी व उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता के नेतृत्व में समिति का गठन किया गया है। मेरठ की बैठक में उत्तराखंड के अधिकारियों ने यूपी की ओर से प्रस्तुत आवासीय संपत्ति की सूची पर यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि जो आवास अत्यधिक जर्जर हैं और जो कुछ बाहरी लोगों के कब्जे में हैं उन्हें ही सूची में शामिल किया गया है। उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मांग है कि आवासीय संपत्तियों का बंटवारा ब्लाकवार होना चाहिए। उप राजस्व अधिकारी एनएस कुंडरा ने बताया कि कुछ संपत्तियों का संयुुक्त रूप से निरीक्षण किया जा चुका है और कुछ का होना है।
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