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फिर रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचा गंगा सभा का चुनाव

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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हाल ही में महीनेभर की मशक्कत के बाद संपन्न हुए गंगा सभा के चुनाव को एक बार फिर से कनखल के पुरोहितों ने रजिस्ट्रार कार्यालय में चुनौती दी है। सहायक उपनिबंधक ने पत्र देकर चुनाव बैठक की अध्यक्षता कर रहे कार्यवाहक सभापति जगदीश अत्री से जवाब मांगा है।
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पिछले महीने 24 अप्रैल को गंगा सभा के चुनाव की घोषणा की गई थी। सभा का चुनाव पूर्ण प्रक्रिया से ज्वालापुर के मालवीय धाम में संपन्न हुआ था। सभा के संविधान के अनुसार तत्कालीन और वर्तमान सभापति कृष्ण कुमार शर्मा की अध्यक्षता में चुनावी बैठक हुई। चूंकि कृष्ण कुमार शर्मा स्वयं भी एक बार फिर से सभापति पद का चुनाव लड़ रहे थे, अत: उन्होंने नामांकन करने के लिए प्रधान सभा के सदस्य जगदीश अत्री को सभापति पद का दायित्व सौंप दिया। गुप्त मतदान पद्वति से हुए मतदान में कृष्ण कुमार शर्मा पुन: सभापति चुने गए। अध्यक्ष पद पर प्रदीप झा और महामंत्री पद पर तन्मय वशिष्ठ का चुनाव 692 मतदाताओं ने किया। चुनाव परिणाम जारी होने के बाद तीनों पदों की घोषणा कर दी गई। इस चुनाव के विरुद्ध रजिस्ट्रार कार्यालय गए अशोक त्रिपाठी खेमे के श्वेतांग त्रिपाठी ने सोसायटी रजिस्ट्रार कार्यालय में ज्ञापन देकर आरोप लगाया कि सभापति कृष्ण कुमार शर्मा को चुनाव कराने का अधिकार नहीं था। स्वयं उनका कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो चुका था। नियमानुसार प्रधान सभा के 21 सदस्यों को एक कार्यवाहक सभापति चुनकर चुनाव कराना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अत: सभा का चुनाव निरस्त होने योग्य है। सोसायटी के उप निबंधक रत्नेश कुमार सिंह ने उस समय बैठक की अध्यक्षता कर रहे कार्यवाहक सभापति जगदीश अत्री को पत्र भेजकर वास्तविक स्थिति से अवगत कराने को कहा है। जगदीश अत्री ने पहले पत्र का कोई जवाब रजिस्ट्रार कार्यालय नहीं भेजा। रत्नेश कुमार सिंह ने फिर से एक पत्र अत्री को भेजते हुए जवाब मांगा है। उन्होंने पूछा है कि सभा के चुनाव संविधान के किस नियम के अंतर्गत कराए गए हैं। जानकारों के अनुसार यदि कार्यवाहक सभापति ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो रजिस्ट्रार गंगा सभा का चुनाव निरस्त कर सकते हैं। इस समय सभा के निर्वाचित और पराजित सभी खेमे बैठकों का दौर चला रहे हैं, ताकि इस प्रकरण का पटाक्षेप कराया जा सके।
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