हरिद्वार। मातृसदन हरिद्वार में 18 दिन से आमरण अनशन पर बैठे स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद को जिला प्रशासन ने जबरन उठा दिया। पुलिस ने उन्हें देहरादून स्थित दून अस्पताल में भर्ती करवाया है। मातृसदन के ब्रह्मचारियों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन पुलिस बल के आगे उनकी एक नहीं चल सकी। गंगा को अविरल बनाने सहित कई अन्य मांगों के समर्थन में सानंद अनशन कर रहे थे।
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद 22 जून से गंगा की अविरलता की मांग को लेकर अनशन पर थे। उनकी शिकायत थी कि गंगा की अविरलता को लेकर उनके ओर से लिख पत्र का प्रधानमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया। इस दौरान स्वामी सानंद के समर्थन में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भी किया गया था। मंगलवार की दोपहर बाद सिटी मजिस्ट्रेट मनीष कुमार सिंह और सीओ कनखल मनोज कत्याल भारी पुलिस बल के साथ मातृसदन पहुंचे। इस दौरान टीम ने अनशन पर बैठे स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद को जबरन उठाकर वाहन में बिठा लिया। पहले उन्हें हरिद्वार अस्पताल में भर्ती करने की तैयारी थी, लेकिन आखिरी समय में प्रशासन की टीम दून अस्पताल ले गई। इससे पहले क्षेत्र में प्रशासन की ओर से धारा 144 लागू कर दी गई थी, ताकि स्वामी सानंद के समर्थन में लोग धरना-प्रदर्शन न कर सकें। नगर मजिस्ट्रेट मनीष कुमार सिंह ने बताया कि चिकित्सकों की रिपोर्ट के आधार पर स्वामी सानंद का जीवन बचाने के लिए कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों ने लगातार गिरते स्वास्थ्य से उनके जीवन को खतरा बताते हुए अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी थी। जिस समय प्रशासन ने यह कार्रवाई कि उस समय मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ध्यान में बैठे हुए थे, जिस कारण वे अपने कक्ष से बाहर ही नहीं आ सके। आश्रम के ब्रह्मचारी दयानंद भी किसी काम से बाहर गए हुए थे।