अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
पतंजलि योगपीठ में डा. टेल्लस ने कहा कि मेडिसिन के नाम पर एलोपैथिक दवाओं का धड़ल्ले से प्रयोग करने से कई साईड इफेक्ट हो रहे हैं। जबकि योग व आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति विशुद्ध रूप से प्राकृतिक व साइड इफेक्ट रहित है। योग व आयुर्वेद सिंप्टोमैटिक इलाज है। यही प्राचीन और अर्वाचीन चिकित्सा विज्ञान के मुख्य भेद हैं। योग व आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति ऋषि परंपरा से प्राप्त प्राचीन चिकित्सा है।
बृहस्पतिवार को पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन तथा पतंजलि विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित एडवांस्ड रिसर्च मैथड फॉर पोस्ट ग्रेजुएट इन कॉपलिमेंट्री एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन विषय पर सात दिवसीय कार्यशाला के प्रथम दिन पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन की डायरेक्टर डा. शरली टेल्लस ने उच्च शोध पर आधारित प्रस्तुतिकरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि योग व आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति ही नहीं, आदर्श जीवन पद्धति भी हैं। योग से शरीर को इतना सशक्त बनाएं कि दवा की जरूरत ही न पड़े और यदि दवा लेना जरूरी हो तो आयुर्वेद से ही इलाज कराएं। आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों का प्रयोग होता है। जिसका शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। आकस्मिक सेवाओं को छोड़कर एलोपैथी चिकित्सा पर ज्यादा निर्भर न रहें। आयुर्वेद की दवाएं रोगों को जड़ से मिटाने में सक्षम हैं। कार्यशाला में एसडीएम कालेज कर्नाटक तथा पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के शोध छात्रा-छात्राएं भाग ले रहे हैं। कार्यशाला में डा. नीलकमल सिंह, सचिन शर्मा, प्रभात मिश्रा, रामकुमार गुप्ता, दीपक पाल, अंकुर कुमार गुप्ता, कनकन गुलाटी आदि ने विशेष योगदान दिया।