अमर उजाला ब्यूरो
लालढांग।
गैंडीखाता के नौरंगाबाद गांव में बीती रात हरपाल सिंह की उल्टी दस्त के बाद मौत होने पर ग्रामीणों ने हंगामा काटा। आरोप है कि वनकर्मियों की लापरवाही से मौत हुुई।
हरपाल की बीती रात तबियत बिगड़ने पर उसकी पत्नी मुन्नी देवी ने आसपास के लोगों को बताया तो पड़ोसियों ने गैंडीखाता से उपचार के लिए प्राइवेट चिकित्सक सत्यपाल को बुलवाया। रात एक बजे डा. सत्यपाल सिंह नौरंगाबाद की तरफ जाने लगे तो रास्ते में गस्त कर रही वन बीट अधिकारी मेहर सिंह सहित वन कर्मियों ने उन्हें घंटों तक रोके रखा। जब डाक्टर मरीज को देखने गांव पहुंचे तो हरपाल की सांसे थम गई थी। हरपाल सिंह की मौत की खबर सुनकर ग्रामीण उत्तेजित हो गए और वन महकमे के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सोमवार सुबह आठ बजे ग्रामीणों ने हरपाल की मौत का जिम्मेदार वन बीट अधिकारी को ठहराते हुए वन चौकी गैंडीखाते पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है वन बीट अधिकारी की हठधर्मिता से हरपाल की मौत हुई है । यदि डाक्टर समय से उपचार कर देते तो हरपाल सिंह की जान बच जाती। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे वन क्षेत्राधिकारी केएल भंडारी का घेराव कर दिया। थानाध्यक्ष श्यामपुर प्रदीप मिश्रा ने ग्रामीणों को शांत कराने की कोशिश की लेकिन वे वन बीट अधिकारी को हटाने की मांग पर अड़े रहे। बाद में वन क्षेत्राधिकारी के एस भंडारी ने वन बीट अधिकारी मेहर सिंह को वन रेंज कार्यालय चिड़ियापुर में अटैच करने के आदेश दिए, तब ग्रामीण शांत हुए। प्रदर्शनकारियों में रामकुवर सिंह, राजपाल सिंह, अशोक सैनी, मुकेश कुमार, रानी, वीना, मोनिका, सुमन, सर्वेश, लता शशि, सत्यपाल सिंह, संजय सैनी, गोविंद सिंह, सूरज सिंह, कैलाश सिंह, योगेंद्र सिंह, विजेंद्र सैनी, सीताराम, रविंद्र सैनी, राजेश, शीशपाल पोखरियाल , गुरजीत लहरी, राजपाल बगियाल एवं अजय चौधरी आदि ग्रामीण मौजूद रहे।