अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निकायों के विस्तार का मामला कोर्ट में विचाराधीन होने से निकाय चुनाव अप्रैल में कराने पर संशय के बादल छाए हुए हैं। ऐसे में वर्तमान निकाय बोर्ड भंग कर प्रशासक नियुक्त करने की स्थिति बन रही है। एक बार पहले भी ऐसा हो चुका है।
प्रदेश के त्रिस्तरीय नगर निकायों को प्रशासकों के हवाले करने की संभावना बन रही है। वर्ष 2013 में नगर निकायों के चार अप्रैल को आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई थी। तब पांच मई को निर्वाचित निकाय बोर्डों ने शपथ ग्रहण कर ली थी। ऐसे में पांच मई तक बोर्ड का गठन हो जाना चाहिए। लेकिन निकायों का सीमा विस्तार को लेकर जगह-जगह विरोध के साथ ही हाईकोर्ट में याचिका दाखिल है। हाईकोर्ट ने नगर निकायों के सीमा विस्तार (परिसीमन) की आपत्तियों पर दोबारा सुनवाई का आदेश देकर सरकार का झटका दिया है। शहरी विकास विभाग के सूत्र बता रहे हैं कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार परिसीमन की प्रक्रिया फिर से पूरी करने में 15 से 20 दिन लगेंगे। इसके बाद हाईकोर्ट सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता आपत्ति करते हैं और कोर्ट उनकी बात मान लेता है तो सरकार को फिर से पूरी प्रक्रिया अपनानी होगी। भवाली तथा कोटद्वार में बड़ी संख्या में सीमा विस्तार के विरुद्ध लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। जिलाधिकारियों को प्रत्येक व्यक्ति की आपत्ति सुनकर उसका निस्तारण करना है। इस स्थिति से निकाय चुनाव अप्रैल में कराने पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। जिससे वर्तमान निकाय बोर्ड भंग (सुपरसिट) कर प्रशासकों के हवाले करने पड़ेंगे। एक बार पहले भी ऐसा हो चुका है। यद्यपि शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी निकाय चुनाव तय अवधि में कराने की बात कहते रहे हैं, लेकिन शासन के सूत्रों की मानें तो चुनाव जून से पहले नहीं हो पाएंगे।