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भारत ही नहीं पूरी दुनिया से गुम हो रही गौरैया

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार ।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग में गौरैया संरक्षण एवं मानव वन्य जीव संघर्ष पर चार दिवसीय कार्यशाला एवं जागरूकता अभियान के समापन समारोह में मुख्य अतिथि डा. रचिता जुयाल ने कहा कि कीटनाशक दवाइयों से बिगड़ रहे पर्यावरण संतुलन का असर पशु पक्षियों पर भी पड़ रहा है। कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर है। समय रहते नहीं चेतने पर गौरैया जैसा परिंदा लुप्त हो जाएगा।
कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि जैविक संतुलन बनाए रखने के लिए गौरैया जैसा परिंदा हमारे बीच होना जरूरी है। कहा कि विश्वविद्यालय एचआरडीए से निर्माण कार्यों में गौरैया का आशियाना जरूर बनाने का अनुरोध किया जाएगा। योगाचार्य डा. साधनानंद ने कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख है कि पक्षियों को हम देवता और बंदरों को पूजने योग्य मानते हैं।
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अंतर्राष्ट्रीय पक्षी विज्ञानी व गौरैया अभियान के जनक प्रो. दिनेश भट्ट ने कहा कि सिक्किम में उनकी शोध टीम गौरैया को बचाने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। प्रो. भट्ट ने बताया कि गौरैया की संख्या में गिरावट अंतर्राष्ट्रीय समस्या है। भारत जैसे जैव विविधता वाले देश में गौरैया का ग्राफ गिरना चिंताजनक है। जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डीएस मलिक ने बताया कि अभियान में युवा पीढ़ी को जोड़ने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर प्रो. नमिता जोशी, प्रो. संगीता विद्यालंकार, डा. वंदना शर्मा, डा. पंकज कौशिक, डा. विकास सैनी, डा. गगन माटा, डॉ. नितिन कांबोज, डा. विनोद कुमार, शोध छात्र रोबिन, पंकज, मेघा, आशीष, डा. अमर सिंह आदि उपस्थित थे।


डा. विनय सेठी सम्मानित
विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर डा. विनय सेठी को एएसपी रचिता जुयाल और विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। डा. सेठी को पक्षी संरक्षण के क्षेत्र में शोध कार्य के लिए पूर्व में उत्तराखंड युवा वैज्ञानिक पुरस्कार एवं इंटरनेशनल आर्निथोलोजिकल कांग्रेस अमेरिका की ओर से जापान में भी पुरस्कृत किया जा चुका है।
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महादेवी वर्मा की कविता का पाठ किया
गौरैया संरक्षण अभियान के तहत उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के नामचीन पक्षी वैज्ञानिक डा. विनय सेठी ने महादेवी वर्मा रचित कविता का पाठ किया गया। उन्होंने कहा कि कई वर्ष पहले कवियत्री महादेवी वर्मा ने यह चिंता जाहिर की थी कि अब ये चिड़िया कहां रहेगी। प्रो. विनोद कुमार ने भी गौरैया को बचाने के लिए कविता पाठ किया।
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