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मौनी बाबा के अस्थि अवशेष गंगा में विसर्जित

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हरिद्वार।
श्री मौनी बाबा की अस्थियां वैदिक विधि-विधान के साथ उनके शिष्य डा. संत सुमन भाई मानस भूषण ने सतीघाट कनखल में गंगा में विसर्जित की। मौनी बाबा को देशभर से आए श्रद्धालुओं ने नम आंखों से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। गंगा में अस्थि विसर्जन की धार्मिक प्रक्रिया पंडित जितेंद्र शास्त्री ने वैदिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न कराई।
उज्जैन से मौनी बाबा का अस्थि कलश डा. संत सुमन भाई, अर्चना शर्मा, अन्य परिजन हिमांशु कौशिक, वर्षा कौशिक, गौरी शर्मा, वैभव शर्मा, तृप्ति शर्मा, पंडित हिमांशु जुयाल आदि लेकर आए थे। गंगा में अस्थि विसर्जन से पूर्व अस्थि कलश कनखल के रामलीला भवन में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा गया।
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उत्तरप्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक डा. संजय तरडे ने भी मौनी बाबा का स्मरण करते हुए कहा कि वे महायोगी थे। उनके विचार हर युग में प्रासंगिक रहेंगे। श्री गंगासभा के अध्यक्ष पंडित पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी ने कहा कि मौनी बाबा उच्च कोटि के साधक थे।
हरिद्वार जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने कहा कि मौनी बाबा कनखल के मूल निवासी थे। कनखल उनकी कर्मभूमि थी और उज्जैन उनकी आध्यात्मिक साधना का केंद्र रहा। नगर पालिका हरिद्वार के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप चौधरी ने कहा किवह सौम्यता, विनम्रता और शालीनता की जीवंत प्रतिमा थे।
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श्री रामलीला कमेटी कनखल के अध्यक्ष पंडित शैलेंद्र त्रिपाठी, मेयर मनोज गर्ग, पूर्व सभासद अशोक शर्मा, प्रद्युम्न अग्रवाल, गजेंद्र कौशिक, राजकुमार त्रिपाठी, प्रेम त्रिपाठी, कुमारी स्वरात्मिका मिश्रा, शिक्षाविद् ईश्वर दयाल विश्नोई, शांतनु मिश्रा, सुभाष चंद्र भाटिया, पंडित पुनीत त्रिपाठी, अनिल गुप्ता, सुभाष, विजय वर्मा, पंडित नितिन माणा, मनोज खन्ना, प्रफुल्ल ध्यानी, मृदुल कौशिक आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
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