हरिद्वार का नगर निगम तेजी से हाईटेक हो रहा है। डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की गति ने रफ्तार पकड़ ली है। इसके लिए धरातल पर काम हो रहा है।
नगर निगम में अभी तक 3112 व्यावसायिक संपत्तियों के रिकार्ड का डाटा कंप्यूटराइज कर अपलोड कर दिया गया है। इसके साथ ही लगभग 40 हजार आवासीय संपत्तियों को डाटा तैयार किया जा रहा है। इससे संपत्ति स्वामियों को अपने टैक्स की स्थिति और संपत्ति स्टेट्स की ऑनलाइन जानकारी मिल जाएगी। यह व्यवस्था पूरी होते ही गृहकर घर बैठे ही ऑनलाइन जमा कराया जा सकेगा। नगर निगम ने बैंक से पेमेंट गेटवे (सर्वर) लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिसके मिलते ही संपत्ति स्वामी अपना संपत्ति कर ऑनलाइन जमा करा सकेंगे। संपत्ति का लेखा-जोखा कंप्यूटरीकृत होने से नगर निगम को संपत्ति कर का बिल तत्काल तैयार करने में मदद मिलेगी। इससे काम में पारदर्शिता आएगी और लोगों को अपनी संपत्ति का रिकार्ड तलाशने के लिए नगर निगम के बाबुओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। संपत्तियों का रिकार्ड मोहल्ला और सर्किल वार तैयार कराया जा रहा है। डाटा साइट पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें बकायेदारों की सूची भी अपलोड की जा रही है।
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शासन भी कर रहा डाटा तैयार
नगर निकायों के संपत्तियों और संपत्ति कर का शासन स्तर पर भी डाटा तैयार किया जा रहा है। नगर निगम संपत्ति कर रिकार्ड शासन को भी उपलब्ध करा रहा है। पूरे प्रदेश की निकायों की संपत्तियों को कंप्यूटरीकृत करने में समय लगेगा इसलिए हमने अपने स्तर से संपत्तियों का डिजिटलीकरण का काम शुरू करा दिया है। बहुत जल्द ही नगर निगम का पूरा लेखा-जोखा ऑनलाइन उपलब्ध होगा और लोग घर बैठे ही एक क्लिक करने पर अपनी संपत्ति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
- नितिन सिंह भदौरिया , नगर आयुक्त
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रिकार्ड बनाया लेकिन लक्ष्य रहा दूर
नगर निगम ने दिसंबर से 31 मार्च तक संपत्ति कर की वसूली के लिए विशेष अभियान चलाया। उसने 7 करोड़ 51 लाख 59 हजार 379 रुपये की वसूली कर रिकार्ड बनाया है। लेकिन नगर आयुक्त की ओर से निर्धारित 10 करोड़ की वसूली का लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाने का मलाल भी कर एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को है। कर एवं राजस्व अधीक्षक रमेश रावत का कहना है कि धर्मशालाओं व आश्रमों को लेकर स्थिति पहले ही स्पष्ट हो जाती तो हम 10 करोड़ संपत्ति कर की वसूली के लक्ष्य को भी पार कर सकते थे।