उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग से हिमालय के ग्लेशियर और तेजी से पिघल सकते हैं। जिसके प्रभाव विनाशकारी हो सकते हैं।
अंग्रेजी वेबसाइट की एक खबर के मुताबिक विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल में लगी आग से धुएं और राख में कार्बन ग्लेशियरों को कवर कर चुका है।
नैनीताल के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर ऑब्जर्वेशनल साइंसेस (एआरआईईएस) और अल्मोड़ा के गोविंद बल्लभ पंत इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एन्वायरन्मेंट एंड डेवलपमेंट (जीबीपीआईएचईडी) ने कहा कि धुएं और राख में मौजूद कार्बन ग्लेशियर्स को कवर कर चुका है और उन्हें पिघला रहा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जंगलों में आग ने नॉर्थ इंडिया में टेम्परेचर 0.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ा दिया है। इससे मानसून पर भी असर पड़ सकता है। इस मामले में साइंटिस्ट किरीट कुमार का कहना है कि ब्लैक कार्बन हवा में लंबे वक्त तक तैरता है। बादलों में जमा रहता है। यह मानसून चक्र को अपनी चपेट में ले लेता है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्लैक कार्बन के बादलों के साथ मिलने से अलग-अलग नतीजे निकल सकते हैं।
जंगलों की आग से गंगोत्री, मिलाम, सुंदरदुंगा, नेवला और चीपा के ग्लेशियर्स पिघल सकते हैं। इस वजह से उत्तर भारत की कई नदियों पर भी असर पड़ सकता है। इसका अध्ययन करने के लिए जल्द ही गोविंद बल्लभ पंत इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एन्वायरन्मेंट एंड डेवलपमेंट से वैज्ञानिकों एक टीम रवाना होगी।