जिस उम्र में बच्चे से कोई चाकलेट, टाफी आदि छीन ले तो वह रोने लगता है, उस उम्र की बच्ची अगर आपदा पीड़ितों की मदद के लिए गोलक में जमा अपनी पूंजी दे तो उसके जज्बे को सलाम किया जाना चाहिए।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
यही नहीं, रुड़की की पौने पांच साल की इस बच्ची ने लंदन में रह रहे अपने अंकल को भी फोन कर पीड़ितों की सहायता के लिए कहा। साथ ही वह सभी लोगों से पीड़ितों की सहायता करने के लिए कहती है।
डेढ़ साल की जमा पूंजी
भागीरथ कुंज कालोनी निवासी और डीपीएस में एलकेजी में पढ़ने वाली तोशानी ने अपनी गोलक में डेढ़ साल की जमा पूंजी 5,375 रुपये दैवी आपदा पीड़ितों की सहायता के लिए दिए हैं। उन्होंने यह राशि भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के जिलाध्यक्ष अजब सिंह के हाथों में 24 जून को दी।
यह पूछने पर कि जमा पूंजी आपदा पीड़ितों को दे दी, अब चॉकलेट कहां से खाओगी, इस पर तोशानी कहती हैं कि आपदा पीड़ितों को भोजन मिलना चाहिए, चॉकलेट तो कभी भी खा लूंगी। उसका यह भी कहना है कि वह आगे भी अपनी जमा पूंजी पीड़ितों को देती रहेंगी।
नन्ही बिटिया पर नाज है
बिटिया के दादा सेवानिवृत्त एमपी शर्मा ने बताया कि जब परिवार के लोग कई दिनों से टीवी पर प्रदेश में आपदा की त्रासदी को देख रहे थे, तब तोशानी भी टीवी पर उनके साथ यह देखती थी, बार-बार पूछती थी कि क्या हुआ।
जब तोशानी को सबकुछ बताया तो उसका दिल भर आया और उसने अपनी जमा पूंजी पीड़ितों के लिए देने की बात कही। पिता कर्नल विजय कुमार शर्मा समेत परिवार के लोगों को इन नन्ही बिटिया पर नाज है।
आपदा से बेचैन था मन
बुधवार को दो
बच्चियां जब ‘अमर उजाला’ कार्यालय पहुंची तो यमुनोत्री इंक्लेव, सेंवला कला निवासी पांच साल की नन्हीं पीहू
मालवा और छोटी बहन अविका का मन भी प्रदेश में आई आपदा से बेचैन था। अखबार
में छपने वाली फोटो देखकर उनका बाल मन अपनी जमापूंजी पीड़ितों की मदद को
देने के लिए उतावला हो रहा था।
कई दिन तक जिद करने के बाद पापा प्रदीप
मालवा उन्हें ‘अमर उजाला’ कार्यालय लेकर पहुंच गए तो मानों उनकी खुशी का
ठिकाना न रहा। गुल्लक को ‘अमर उजाला’ कार्यालय में तुड़वाया तो सिक्के
देखकर खुशी से उछल पड़ी। इससे 199 रुपये निकले। बच्चियों के चेहरे पर
संतुष्टि साफ देखी जा सकती थी।