राष्ट्रपति शासन ने प्रदेश की पुलिस की भागदौड़ बढ़ा दी है। प्रदेश में होने वाली हर छोटी-बड़ी वारदात पर राजभवन की नजर है। साथ ही पुरानी आपराधिक घटनाओं पर राज्यपाल की सलाहकार परिषद पुलिस अधिकारियों से फालोअप ले रही है।
यह सारी कवायद राज्यपाल डॉ. केके पाल के निर्देश पर प्रदेश में क्राइम कंट्रोल के लिए हो रही है। मालूम हो कि राज्यपाल पूर्व आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं। राज्यपाल की प्राथमिकता में प्रदेश की कानून व्यवस्था होने से पुलिस के आला अधिकारियों के हाथपांव फूले हुए हैं।
सरकार के राज में जहां स्पेशल मामलों में ही अधिकारियों से जवाब तलब होता था अब स्थिति ठीक उलट है। हर वारदात पर अधिकारियों से जवाब मांगा जा रहा है। वैसे भी प्रदेश के अधिकारियों के लिए राष्ट्रपति शासन का यह पहला अनुभव है। उससे भी बड़ी बात यह है कि खुद राज्यपाल केके पाल लंबे समय दिल्ली पुलिस के कमिश्नर रहे हैं, इसलिए पुलिस के कामकाज की हर बारीकी से वह पूरी तरह वाकिफ हैं।
पुलिस अधिकारियों में बैचेनी, अपराधों पर रोजमर्रा की समीक्षा
राज्यपाल के सलाहकार प्रकाश मिश्रा भी सीआरपीएफ के डीजी रहे चुके हैं। ऐसे में अपराध और कार्रवाई पर उनकी पैनी नजर रहना स्वाभविक है। अपराधों पर रोजमर्रा की समीक्षा के साथ संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। चोरी और झगड़ों तक का भी संज्ञान लेकर जवाब तलब किया जा रहा है।
इससे पुलिस अधिकारियों में बैचेनी बढ़ी है। राज्यपाल और सलाहकार परिषद के माध्यम से आने वाले प्रार्थना पत्रों का भी रिकार्ड रखा जा रहा है। क्योंकि प्रदेश भर से लोग शिकायत लेकर राजभवन और सचिवालय पहुंच रहे हैं।
इनमें 40 प्रतिशत शिकायत पुलिस और कार्रवाई से जुड़ी हैं। राजभवन की सक्रियता से पुलिस अधिकारियों को भी खुद को अपडेट रहना पड़ रहा है क्योंकि न जाने कब राजभवन से किस वारदात के बारे में पूछ लिया जाए।