उत्तराखंड में गंगोत्री के कपाट को सोमवार को अन्नकूट के पर्व पर 6 महीने के लिए बंद कर दिया गया।
कल बंद होंगे यमुनोत्री के कपाट
जबकि पांच नवंबर को भैया दूज पर यमुनोत्री मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे। इसके बाद गंगा जी की भोगमूर्ति को मुखबा तथा यमुना जी की उत्सव मूर्ति को खरसाली स्थित मंदिर में प्रतिष्ठापित किया जाएगा। शीतकाल में श्रद्धालु तीर्थ पुरोहितों के उक्त गांवों में दर्शन एवं पूजा-अर्चना का पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे।
मुखबा के लिए रवाना
चार नवंबर सोमवार को गंगोत्री में प्रात: 9:30 से धार्मिक अनुष्ठान शुरू कर पूर्वाह्न 11 बजे गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। यहां से गंगा जी की भोगमूर्ति को डोली यात्रा के साथ मुखबा के लिए रवाना किया गया।
गंगोत्री में मंदिर समिति शीतकाल की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुटी है। यहां अगले वर्ष कपाट खुलने तक मंदिर में अखंड ज्योति जलती रहेगी तथा इसकी देखरेख के लिए कुछ पुजारी सर्दियों में भी यहीं रहेंगे। उधर, यमुना जी के मायके खरसाली में भी बेटी के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं।
पांच नवंबर की सुबह समेश्वर देवता अपनी बहिन यमुना को लिवा लाने के लिए यमुनोत्री रवाना होंगे। इसी दिन यमुनोत्री मंदिर के कपाट बंद कर यमुना जी की उत्सव मूर्ति को डोलीयात्रा के साथ खरसाली लाकर मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
चार नवंबर के बाद अगले साल कपाट खुलने तक मुखबा में ही गंगा जी के दर्शन एवं पूजा-अर्चना की व्यवस्था रहेगी। सरकार को शीतकाल में भी मुखबा तक के रास्ते तथा यात्री सुविधाएं बहाल रखने की व्यवस्थाएं करनी चाहिएं।
पं.भागेश्वर प्रसाद सेमवाल, अध्यक्ष, गंगोत्री मंदिर समिति।