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आईटीबीपी की मुख्य धारा से जुड़े सहायक सेनानी

Thu, 17 Mar 2016 10:47 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, मसूरी
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अाईटीबीपी - फोटो : amar ujala
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25 सप्ताह के आंतरिक और बाह्य क्रियाकलापों के कठोर प्रशिक्षण के बाद आठ सहायक सेनानी भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल की मुख्यधारा से जुड़ गए हैं।
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आईटीबीपी अकादमी में आयोजित नवें एसी जीडी बेसिक कोर्स के दीक्षांत एवं शपथ ग्रहण समारोह में आत्मविश्वास से लबरेज नव सैन्य अधिकारियों ने देश की आन-बान-शान की रक्षा के लिए तिरंगे और बल ध्वज के सम्मुख शपथ ली। बल की वेशभूषा में सजे नव सैन्य अधिकारियों की परेड का निरीक्षण अकादमी के निदेशक और महानिरीक्षक एचएस गौराया ने किया।

बुधवार को दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि निदेशक एचएस गौराया ने कहा कि 25 सप्ताह में प्रशिक्षण के दौरान जो कुछ भी इन नव सैन्य अधिकारियों ने सीखा, वह जीवन पर्यंत काम आएगा। शपथ लेने के बाद अब इनके सामने कई चुनौतियां आएंगी। इनको धैर्य और संयम के साथ चुनौतियों का सामना करना होगा।
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इन नव सैन्य अधिकारियों को देश के विभिन्न हिस्सों से लेकर खासतौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी का नेतृत्व करने को मिलेगा। उस वक्त प्रशिक्षण में जो सिखाया गया, वही काम आएगा। दीक्षांत समारोह में कराटे बाजों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। परेड के बाद नव सैन्य अधिकारियों के कंधों पर परिजन और बल के अधिकारियों ने बैज लगाए। इसके बाद नव सैन्य अधिकारियों ने टोपी उछालकर जश्न मनाया।

हरिद्वार के विनोद कुमार ओवरऑल बेस्ट ट्रेनी
प्रशिक्षण के दौरान उत्तराखंड के हरिद्वार के विनोद कुमार को ओवरऑल बेस्ट ट्रेनी के खिताब से नवाजा गया। जबकि, बेस्ट इनडोर का अवार्ड प्रवीण कुमार और बेस्ट आउटडोर का अवार्ड देवाशीष राय को दिया गया।

कहां के कितने नव सैन्य अधिकारी
उत्तराखंड - 2
हरियाणा - 2
हिमाचल प्रदेश - 1
बिहार - 1
झारखंड - 1
पश्चिम बंगाल - 1

‘सेना में राष्ट्र सेवा का स्वर्णिम अवसर’
हरिद्वार जनपद के खानपुर ब्लाक के प्रहलाद किसान परिवार में जन्मे विनोद अपनी ईमानदार कोशिश और परिश्रम केे बल पर सिपाही से अधिकारी बन गए। विनोद कुमार के पिता सौराज गांव में खेती बाड़ी का काम करते हैं। विनोद वर्ष 2002 में आईटीबीपी में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। सिपाही से सफर शुरू करने के बाद आज विनोद असिस्टेंट कमांडेंट बन गए हैं। सिपाही से एक अधिकारी तक का सफर तय करने वाले विनोद कुमार का कहना है कि ईमानदार कोशिश और कठिन परिश्रम इंसान के लक्ष्य को आसान कर देता है। हालांकि लक्ष्य साधने के लिए अन्य घटक भी कारगर होते हैं।
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विनोद ने युवाओं का संदेश दिया कि पैरामिलिट्री और सेना में अपार संभावनाएं हैं। राष्ट्र सेवा का स्वर्णिम अवसर ही सेना में मिलता है। आईटीबीपी अकादमी के परेड मैदान में नवें एससी जीडी के दीक्षांत समारोह में विनोद कुमार न सिर्फ सिपाही से अधिकारी बने, बल्कि इन्हें ओवरऑल बेस्ट ट्रेनी के खिताब से भी नवाजा गया। इस शानदार परेड की गवाह विनोद की मां विम्मू देवी भी बनीं। बेटे की सफलता पर विम्मू देवी कुछ बोल नहीं पाईं। खुशी से वह भाव विभोर हो र्गइं। स्वास्थ्य खराब होने के कारण उनके पिता परेड का हिस्सा नहीं बन पाए।
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