उत्तराखंड में नगर निकाय चुनाव के परिणाम वैसे ही मिले, जैसी पहले से उम्मीद थी। सरकार के एक साल के काम और उपलब्धियां जनता को प्रभावित नहीं कर सके, जिसके चलते कांग्रेस को नगर निगमों में शिकस्त मिलने के साथ ही नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके।
खुश होने के लिए भाजपा के पास भी बहुत कुछ नहीं है। नगर निगमों के मेयर पद को छोड़ बाकी निकायों में उसकी भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। बड़ी संख्या में निर्दलीयों की जीत हुई है। यह दलों की बजाय निर्दलीयों पर बढ़ते भरोसे का भी संकेत है।
इस चुनाव में गैरसैंण भी नहीं चला। विधान भवन देकर पर्वतीय क्षेत्र की भावना को भुनाने की सरकार की कोशिशें शायद जनता को प्रभावित नहीं कर सकीं। गैरसैंण में ही कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। इससे यह भी साफ हो रहा है कि स्थानीय मुद्दे और विकास इस चुनाव में ज्यादा प्रभावी रहे।
प्रत्याशियों की खुद की छवि भी चुनाव के परिणाम पर हावी रहे। इन परिणामों ने सरकार के एक साल के कामों की कलई खोलने के साथ ही लोकसभा चुनाव को लेकर जनता का रुझान भी दे दिया।
सांसद और मंत्रियों के साथ ही साल भर पहले विधायक बने नेताओं का प्रभाव अपने ही क्षेत्र में कितनी तेजी से गिरा, इस चुनाव के परिणाम बता रहे हैं।
टिहरी लोकसभा उप चुनाव जीत कर भाजपा की सांसद बनी राजलक्ष्मी शाह से छह महीने में ही जनता का विश्वास डोल गया। इस लोकसभा की ज्यादातर निकायों पर कांग्रेस मजबूत होकर उभरी है।
यह मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की लोकसभा सीट रही है। पिछले साल अक्तूबर में इसी संसदीय क्षेत्र की जनता ने मुख्यमंत्री के सुपुत्र साकेत बहुगुणा को हरा दिया था।
लेकिन छह महीने में ही कांग्रेस के प्रति जनता का विश्वास लौटा है। हालांकि मुख्यमंत्री अपने ही कृपापात्र सूर्यकांत धस्माना को देहरादून नगर निगम के मेयर पद पर जीत दिलाने में असफल रहे। देहरादून नगर निगम क्षेत्र में तीन विधानसभा सीटें हरिद्वार लोकसभा सीट की आती हैं।
जिसमें से एक सीट नियोजन मंत्री दिनेश अग्रवाल की भी है। उनका भी प्रभाव जनता पर नहीं चला और मेयर पद के साथ ही वार्डों में भी कांग्रेस की परफारमेंस ठीक नहीं रही।
कांग्रेस सांसद और केंद्रीय मंत्री हरीश रावत अपने संसदीय सीट हरिद्वार की निकायों में कांग्रेस की लाज नहीं बचा पाए। हरिद्वार और रुड़की नगर निगम हारने के साथ ही इस संसदीय सीट में आने में वाली नगर पालिका और नगर पंचायतों में भी कांग्रेस की स्थिति काफी खराब रही।
हरिद्वार नगर निगम के प्रत्याशी हरीश रावत की पसंद बताए गए। रावत ने उनके लिए प्रचार भी किया, लेकिन जिता नहीं पाए।
कांग्रेस सांसद सतपाल महाराज की पौड़ी गढ़वाल सीट के निकायों पर भी कांग्रेस काफी कमजोर रही। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी अपनी ही विधानसभा कोटद्वार में कांग्रेस को जिताने में असफल रहे।
कृषि मंत्री हरक सिंह रावत की विधानसभा सीट रुद्रप्रयाग में कांग्रेस को इज्जत बचानी भारी पड़ गई। यही स्थिति कुमाऊं मंडल में रही।
नैनीताल सांसद केसी सिंह बाबा के संसदीय सीट की ज्यादातर निकायों पर भाजपा ने कब्जा जमाया और प्रदीप टम्टा की लोकसभा सीटों पर कांग्रेस की स्थिति बहुत बेहतर नहीं रही है।
राज्य कैबिनेट की कद्दावर मंत्री इंदिरा हृदयेश की खुद की विधानसभा सीट हल्द्वानी पर मेयर पद का कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहा। वहीं पर्यटन मंत्री अमृता रावत के विधानसभा क्षेत्र रामनगर की निकायों में भी कांग्रेस प्रभावहीन दिखी। ऊधमसिंहनगर जिले में भी कांग्रेस की परफारमेंस काफी खराब रही।
जबकि इस जिले के सितारगंज विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा खुद हैं और राजस्व मंत्री यशपाल आर्य भी बाजपुर से विधायक हैं।
भाजपा के दिग्गजों में पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के गृह नगर कपकोट नगर पंचायत में भाजपा ने जीत दर्ज की है।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की विधानसभा क्षेत्र की डोईवाला नगर पंचायत में भी भाजपा की जीत हुई है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी की विधानसभा सीट कोटद्वार में भाजपा तीसरे नंबर रही।