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केदारनाथ्ाः कमाई के लिए गए थे... लौट के नहीं आए

Mon, 01 Jul 2013 01:31 AM IST
संदीप थपलियाल
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केदारनाथ हादसे के बाद लमगौंडी गांव के बडे़-बड़े घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। लगभग 1200 की आबादी वाले गांव की आर्थिकी केदारनाथ मंदिर से जुड़ी हुई है।
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यहां के लोग यात्राकाल शुरू होने पर धाम में यजमानी और दुकानदारी करते हैं। आपदा के बाद 25 कमाऊ लोग लापता हैं। गांव में ऐसा शायद ही कोई घर होगा जहां किसी मां का बेटा, किसी सुहागन का सुहाग और किसी बच्चे का पिता लापता न हो।

ग्राम पंचायत लमगौंडी में हेमंत बाजपेयी का घर। घर पर उनकी दो बेटियां सपना (15) और शिवानी (14) हैं। हेमंत और उनके 12 वर्षीय बेटे सुमिरन का शव केदारनाथ मंदिर के मुख्य गेट पर देखा गया था।
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डेढ़ साल पूर्व हेमंत की पत्नी की मौत हो गई थी। अब इन मासूमों को चाचा अनुज का ही सहारा है। हादसे के दिन अनुज केदारनाथ मंदिर में थे।

संदीप लालमोरिया (शर्मा) का घर। परिवार में पत्नी वीणा देवी, पुत्री अर्चना, आराधना और राघव हैं। एक पुत्री परिणिता की शादी हो गई है। अर्चना इंटर कर चुकी है। आराधना 11वीं और राघव पांचवीं में है।

संदीप केदारनाथ में यजमानी का कार्य करते थे। हादसे के बाद से लापता हैं। भाई देशदीप बताते हैं कुछ लोगों ने जानकारी दी कि संदीप का शव केदारनाथ में पड़ा था। हम जाना चाहते थे। पुलिस ने नहीं जाने दिया। पता भी नहीं चला भाई की अंत्येष्टि हुई कि नहीं।

65 वर्षीय जसोदा देवी के दो जवान बेटे अनिल और सुनील केदारनाथ हादसे के बाद से लापता हैं। अनिल की पत्नी मंदोदरी बताती हैं कि 16 जून को अनिल से बात हुई थी।

उन्होंने बच्चों की स्कूल खुलने से पूर्व घर आने का वादा किया था, लेकिन अब सब कुछ लुट गया है। अनिल की तीन बेटियों नेहा (8), निकिता (6) और निधि (4) को पता नहीं है कि उनके पिता कभी लौटेंगे भी या नहीं।

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कमाने वाले तो गए...
जसोदा देवी के बेटे अंबुज और अनिल लापता हैं। अंबुज लमगौंडी और अनिल केदारनाथ में ही दुकान करता था। अंबुज हादसे से दो दिन पूर्व ही भाई के पास केदारनाथ गया था।

अंबुज की दो बेटी और एक बेटा और अनिल की दो बेटियां हैं। समस्या यह है कि दोनों ने मकान बनाने के लिए सात लाख रुपये कर्जा लिया था। दोनों की पत्नियों पर पहाड़ टूटा है। इस बात की भी चिंता है कि कर्ज कैसे चुकता होगा।

केदारनाथ बाढ़ में बहे नीरज के भाई मनीष अवस्थी बताते हैं कि उनकी धाम में धर्मशाला है। वह और उनका एक भाई बाढ़ आने पर दुमंजिले भवन की छत पर चढ़ गए थे, लेकिन नीरज हड़बड़ाहट में भागने लगा और इसके बाद नहीं दिखा।

ग्राम प्रधान नरेंद्र शर्मा बताते हैं कि आपदा के 13 दिन बाद अब लोग अपनों की वापसी की उम्मीद छोड़ चुके हैं। उन्हें दुख इस बात का है कि वे अपने दिवंगत परिजन का अंतिम दर्शन और संस्कार भी नहीं कर पाए।

दीवली भणिग्राम से 54 लोग लापता

ऊखीमठ की ग्राम पंचायत दीवली भणिग्राम के 54 लोग केदारनाथ, रामबाड़ा और गौरीकुंड से लापता चल रहे हैं। गर्मियों की छुट्टियां होने के कारण कुछ लोग अपने बच्चों को भी मदद के लिए साथ ले गए।

केदारनाथ में तीर्थ पुरोहित केशरी प्रसाद अपने दो बेटों राजीव और संजीव को ले गए थे। 17 जून की सुबह सात बजे से पहले उनकी घर में बात हुई थी। उन्होंने अपनी पत्नी वसुंधरा को फोन कर बताया था कि मौसम बहुत खराब है। नदी का पानी चढ़ रहा है। इसके बाद से पिता-पुत्रों का पता नहीं है। घर में अकेली वसुंधरा है।

65 वर्षीय सुलोचना देवी के दुखों की गाथा अंतहीन है। दो वर्ष पूर्व उनका पुत्र, पुत्रवधू और एक पोती शार्ट सर्किट से लगी आग में जल गए थे। तब से वे अपने दो पोतों की जिम्मेदारी अपने बूढे़ कंधों पर ढो रही हैं। आमदनी का जरिया केदारनाथ में दो दुकानें ही थी। इसे किराये पर दे रखा था। बाढ़ में दुकान बह गई। अब वह सहारा भी छिन गया।

छुट्टियां पड़ी बच्चों पर भारी
आनंद शुक्ला केदारनाथ में यजमानी करते थे। 19 साल के बेटे अंकित को भी ले गए थे। बेटी ममता और पुत्र प्रवेश घर पर मां के साथ थे। पिता-पुत्र जल प्रलय के बाद से लापता हैं। आनंद के साथ उनके बडे़ भाई नरेंद्र भी थे। नरेंद्र बताते हैं कि दो घंटे तक मलबे में फंसा रहा। उनके भतीजे ने बताया कि चाचा और भाई पानी में बह गए।
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हादसे ने गांव वालों को बुरी तरह से तोड़कर रख दिया है। यह भी शिकायत है कि सरकारी कारिंदा हो या विधायक कोई उनका हालचाल पूछने नहीं आया। ना तो उनको केदारनाथ जाने दिया जा रहा है और ना ही उनके परिजनों के बारे में कुछ बताया जा रहा है। यदि प्रशासन ने उनका दाह संस्कार कर दिया है, तो उसकी सूचना तो दे सकता था।
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