सीआरपीएफ के डीआईजी एम. दिनाकरण बताते हैं कि देश के तकरीबन हर हिस्से में यह बल मौजूद है। बल के अधिकारी और जवान, लोगों को कोरोना के बारे में प्रेक्टिकल करके दिखाते हैं।
वे अपने आसपास का इलाका कैसे सैनिटाइज करें, यह जानकारी दी जाती है। राजबाग (श्रीनगर) में लोगों को बल की ओर से हर तरह की मदद दी जा रही है। केवल वहीं नहीं, बल्कि देश के हर हिस्से में जहां पर ये बल तैनात है, वहां पर लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग की एक अभेद दीवार बना ली है।
अब यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। वे लोग एक तय दूरी बनाकर आपस में चर्चा करते हैं। गांव में कोई बाहर का व्यक्ति तो नहीं आया है। गांव का कोई ऐसा व्यक्ति जो शहर में रहता हो और अब गांव आ गया हो, उसका नाम भी वे तुरंत बता देते हैं।
जवानों ने लोगों को राशन के अलावा कोरोना से बचाव के लिए मास्क प्रदान किए हैं।
बीएसएफ के गुवाहाटी फ्रंटियर ने भी सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब समझाया है। इनकी सोशल डिस्टेंसिंग को चेक भी किया गया। राशन लेने के बाद जब ये लोग अपने घर जाते हैं, तो रास्ते में दूसरे लोगों से दो मीटर की दूरी बना लेते हैं।
देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान इन लोगों तक रसद और अन्य सामग्री पहुंचाई जा रही है। जब भी ये लोग राशन के लिए आते हैं तो बीएसएफ अधिकारी इन्हें पैकेट देने से पहले कोरोना से बचने के लिए नियमों की जानकारी देता है। महिलाएं और बच्चे भी अब लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब अच्छी तरह समझ गए हैं।