उत्तराखंड के बहाने अब कांग्रेस का आलाकमान दिल्ली में भाजपा और मोदी सरकार को पटखनी देने की तैयारी कर रहा है।
पार्टी का मानना है कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार बेहद कमजोर है। कांग्रेस आलाकमान इस मामले को संवैधानिक बहस का रूप देने की कोशिश में भी है।
ऐसे में हरीश रावत को रणनीतिक रूप से कमजोर न होने देने और बाकी बचे कांग्रेस विधायकों को एकजुट रहने देने पर जोर दिया जा रहा है। कांग्रेस के स्तर से यह भी माना जा रहा है कि नौ बागी विधायकों ने भाजपा का साथ देकर पार्टी की स्थिति को मजबूत ही किया है।
अन्य राज्यों से इतर उत्तराखंड में सियासी लड़ाई भाजपा बनाम कांग्रेस की ही दिख रही है। माना जा रहा है कि कांग्रेस के नौ बागी विधायकों को सामने कर भाजपा इस लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में बागी विधायकों का समीकरण अब कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।