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स्वामी चिदानंद मुनि के खिलाफ परिवाद दर्ज

Wed, 13 Apr 2016 10:32 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, रोशनाबाद (हरिद्वार)
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- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की धर्मपत्नी स्व. कमला आडवाणी की आधी अस्थियों को ऋषिकेश ले जाने के मामले में स्वामी चिदानंद मुनि के खिलाफ परिवाद दायर किया गया है।
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परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए युवा तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष उज्ज्वल पंडित ने प्रथम अपर सिविल जज जेडी हरिद्वार की अदालत में परिवाद दायर किया है। परिवाद को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए न्यायालय ने अगली तारीख तीन मई नियत की है।

रविवार को कमला आडवाणी की अस्थियां हरिद्वार में गंगा में विसर्जित की गई थी लेकिन कुछ अस्थियों का विसर्जन नहीं करके लालकृष्ण आडवाणी और उनका परिवार परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि के साथ ऋषिकेश ले गए थे।
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ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम में बची हुई अस्थियां जमीन में डालकर उनके ऊपर पौधा रोपा गया था। इससे पुरोहित समाज आंदोलित है। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष उज्जवल पंडित ने मंगलवार को अपने अधिवक्ता अरुण भदौरिया के मार्फत स्वामी चिदानंद मुनि पर यह आरोप लगाते हुए वाद दायर किया कि वह ही कमला आडवाणी की आधी अस्थियों के साथ आडवाणी परिवार को अपने साथ ले गए।

उनके इस कृत्य से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने बताया कि वादी के बयान के लिए तीन मई की तारीख नियत की गई।

चिदानंद के खिलाफ युवा पुरोहितों ने किया प्रदर्शन
पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की पत्नी स्व. कमला आडवाणी की अस्थियां ऋषिकेश ले जाने के खिलाफ अखिल भारतीय युवा तीर्थ पुरोहित महासभा ने हरकी पैड़ी पर स्वामी चिदानंद मुनि के खिलाफ प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि वे लगातार हरकी पैड़ी और गंगा की मर्यादा तारतार कर रहे है।

उधर, अखिल भारती वंशावली संरक्षण एवं संवर्द्धन संस्थान ने चिदानंद की भर्त्सना की है। मौके पर विरोध न करने के लिए गंगा सभा के पदाधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया है। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उज्ज्वल पंडित के नेतृत्व में युवा पुरोहित चिदानंद के विरुद्घ नारेबाजी करते हुए हरकी पैड़ी पहुंचे।

महामंत्री सुमित श्रीकुंज ने कहा कि भगवाधारी धर्माचार्य मर्यादा तोड़ रहे हैं। 2012 में चिदानंद ने सौगंध ली थी कि वे हरिद्वार वासियों की आस्था को आहत नहीं करेंगे। वह शपथ झूठी साबित हुई। अभिषेक वशिष्ठ ने कहा कि हरिद्वार आगमन पर चिदानंद का विरोध किया जाएगा। शैलेष गौतम ने कहा कि हरिद्वार के संत समाज को भी मर्यादाएं तोड़ने वाले चिदानंद को अपने कार्यक्रमों में नहीं बुलाना चाहिए। अंकुर पालीवाल, अनिमेष शिवपुरी, प्रवीण शर्मा, डा. सिद्घार्थ चक्रपाणी, पंकज अधिकारी, प्रवीण मिश्रा आदि ने भी विचार रखे।

अखिल भारतीय वंशावली संरक्षण संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सेठ ने कहा कि गंगा सभा के तीनों पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह काम हुआ। जिम्मेदार पदाधिकारियों का दायित्व था कि वे चिदानंद मुनि को ऐसा करने से रोकते। हरकी पैड़ी पर अनादि काल से अस्थि विसर्जन होता आया है। ऋषिकेश में अस्थियां ले जाना शास्त्र विरुद्घ है। उन्होंने मुनि चिदानंद से आग्रह किया कि वे भविष्य में हरकी पैड़ी की मर्यादा से खिलवाड़ न करें।
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