उत्तराखंड के चमोली जनपद से लगे माणा पास में चीन की गतिविधि से भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। भारतीय इतिहास में पहली बार माणा पास तक चीन की धमक हुई है। आईटीबीपी के एक अधिकारी ने भी सीमा पर चीन की इस करतूत की पुष्टि की है।
अब तक नीती घाटी के नो मेन्स लेंड बाड़ाहोती में ही चीनी सैनिकों की गतिविधि रहती थी लेकिन इस बार माणा पास की जमीन पर चाइना लिखकर चीन ने सीमा का उल्लंघन किया है।
हालांकि, आईटीबीपी के अधिकारी इस मामले में कुछ भी स्पष्ट कहने से बच रहे हैं। आईटीबीपी के एक अधिकारी का कहना है कि गत वर्षों तक सीमा पर चीन सैनिकों को झुंड में देखा जाता था लेकिन इस बार अभी तक भारतीय चरवाहों ने चीन की ओर से एक-दो लोगों की गतिविधि देखी।
इसके बाद सीमा पर कोई गतिविधि नहीं देखी गई है। माणा पास पर चीन की गतिविधि जरूर गंभीर मामला है। भारत के अंतिम गांव माणा से मीलों दूर सीमा क्षेत्र में घसतोली, राक्षस ताल, देवताल नामक स्थान स्थित हैं। देवताल से करीब आधा किमी की दूरी पर भारत का माइल स्टोन स्थित है। इसे भी तोड़ दिया गया है।
यहां भी चीन की नजर
भारत-तिब्बत व्यापार जब अपने चरम पर था तो वर्ष 1959 में चीन ने उत्तराखंड से लगी सीमा पर भी हरकत शुरू कर दी थी। भारत-तिब्बत व्यापार की सबसे बड़ी मंडी बाड़ाहोती को भी चीन अपनी सीमा बताने का हमेशा प्रयास करता है। हालांकि, इस क्षेत्र पर भारत का कब्जा है। बाड़ाहोती बुग्याल की दूरी 10 किमी से अधिक है। यह वर्तमान में नो मेन्स लेंड है।
आईटीबीपी करती है सीमा की रक्षा
आईटीबीपी भारत-तिब्बत-चीन सीमा की रक्षा के लिए सबसे मुस्तैद बल है। उत्तरी सीमांत के अंतर्गत दो क्षेत्रीय मुख्यालय, नौ वाहिनियां आईटीबीपी की है। यह भारत-तिब्बत सीमा की 345 किमी की सीमा क्षेत्र की रक्षा करती है।
इसमें 205 किलोमीटर गढ़वाल क्षेत्र में, 410 किमी कुमाऊं क्षेत्र की है। चीन सीमा के फ्रंट लाइन पर आईटीबीपी और द्वितीय रक्षा पंक्ति में सेना मुस्तैद है।
शासन-प्रशासन अब तक अंजान
माणा पास में चीनी गतिविधियों से उत्तराखंड का शासन और प्रशासन अब तक अनभिज्ञ है। राज्य का खुफिया तंत्र सक्रिय जरूर हुआ, मगर अब तक उसके हाथ कुछ लगा नहीं है।
जिला अधिकारी एस.ए. मुरुगेशन का कहना है कि अधिकारिक तौर पर उन्हें सीमा पर ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी नहीं है।
पुलिस अधीक्षक चमोली, अजय जोशी का कहना है कि माणा पास में चीन की घुसपैठ की अभी पुष्टि नहीं हुई है। जानकारी मिलने के बाद तथ्यों की पड़ताल के लिए टीम भेजी गई है। विषय अंतरराष्ट्रीय है, लिहाजा ऐसे संवेदनशील मामले में जब तक वास्तविक तथ्य नहीं आ जाते, कुछ बताना संभव नहीं है।
पुलिस मुख्यालय भी अब तक इस प्रकरण में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा है। राज्य के गृह विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्र को कोई जानकारी तब भेजें, जब उनके पास बताने को कुछ हो।
खुफिया महकमे से शासन को कोई जानकारी नहीं आई है। वहीं डीजीपी का कहना है कि यह प्रकरण सीमा से जुड़ा है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आईटीबीपी के पास है। आईटीबीपी ही कुछ बता सकती है।
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