उत्तराखंड में आई दैवी आपदा बीती एक सदी में देश के विभिन्न हिस्सों में आई बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। इस दैवी आपदा की चपेट में करीब डेढ़ लाख लोग आए हैं।
भले ही यह संख्या सर्वाधिक नहीं है, लेकिन फंसे लोगों को बचाने के लिए चला राहत और बचाव अभियान सबसे बड़ी कार्रवाई में शुमार हो गया है। सुनामी 2004, लातूर भूकंप 1993, कच्छ भूकंप 2001 आदि में भी इतना बड़ा हेली रेस्क्यू नहीं चलाया गया था।
एयरफोर्स का मानना है कि इससे बड़ा हेलीकाप्टर बचाव अभियान अब तक किसी भी तरह की आपदा में नहीं चला है।
उत्तराखंड में 16 जून को आई दैवी आपदा और 17 जून से जारी राहत एवं बचाव अभियान का पहला सत्र 3 जुलाई को समाप्त हुआ। इस दौरान जगह जगह फंसे करीब सवा लाख लोगों को सुरक्षित निकाला गया। हालांकि राहत कार्य अब भी जारी है।
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केदारनाथ, बदरीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में एक साथ शुरू राहत और बचाव अभियान में सेना और अर्द्धसैनिक बलों के 12 हजार जवान के साथ ही लगभग 70 हेलीकाप्टर व विमान लगाए गए।
वायुसेना के आपरेशन राहत के बतौर टास्क कमांडर तैनात रहे एयर कोमोडोर राजेश इस्सर ने बताया कि एयरफोर्स के इतिहास में उत्तराखंड आपदा के दौरान बचाव एवं राहत अभियान में लगाए गए हेलीकाप्टरों और विमानों को अब तक का सबसे बड़ा हेली रेस्क्यू आपरेशन करार दिया है।
अब तक का सबसे बड़ा सैन्य बचाव अभियान
- प्रभावित जनपद रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़
- इस दैवी आपदा की चपेट में करीब 1.50 लाख लोग आए
- सेना व अर्द्धसैनिक बलों के 12 हजार जवान
- वायुसेना के 37 और सेना के 12 हेलीकाप्टर
- सिविल प्रशासन ने उतारे 15 छोटे हेलीकाप्टर
- वायुसेना के सी 130जे, आईएल 76, एएन 32 और एव्रो विमानों का इस्तेमाल
- सैन्य बलों ने सुरक्षित निकाले 90 हजार लोग, सिविल ने 30 हजार लोग
- आपदा में मरने वालों की संख्या 580, लापता लगभग चार हजार
सर्वाधिक लोग एयर लिफ्ट कर निकाले
- वायुसेना ने 2316 उड़ानों से 22,012 लोगों को एयरलिफ्ट किया
- सेना ने 784 उड़ानों से 3,406 लोगों को एयरलिफ्ट किया
- सिविल हेलीकाप्टरों से चार हजार लोगों को एयरलिफ्ट किया
- हेलीकाप्टरों से 300 टन रसद अब तक पहुंचाई गई
सुनामी : 2004
हिंद महासागर में भूंकप से पैदा हुई सुनामी में भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह सहित तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश के तटीय क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित हुए। लगभग 10 हजार लोग मारे गए और पांच हजार लापता हुए। इस अभियान में भारतीय नौसेना ने व्यापक अभियान आपरेशन मदद चलाया था।
आपरेशन मदद के अलावा तीन अन्य अभियान विदेशों (श्रीलंका, मालद्वीव, इंडोनेशिया) के लिए भी चलाए गए। नौसेना के अभियान में 32 जहाज, 7 विमान, 20 हेलीकाप्टर 15 दिन तक चलाए गए। सेना की राहत कार्य में मदद ली गई। 17 जनपदों में चले आपरेशन मदद से लगभग एक लाख लोगों को निकाला गया।
लातूर भूकंप : 1993
महाराष्ट्र के लातूर और ओसमनाबाद में रिक्टर स्केल पर 7.0 के भूकंप से दो जनपद प्रभावित हुआ। लगभग बीस हजार की मौत और 30 हजार घायल हुए। यहां बचाव अभियान में सेना और अर्द्धसैनिक बलों को मलबे के नीचे शवों और घायलों को निकालने में लगाया गया। लेकिन यहां भी ज्यादा संख्या में न तो हेलीकाप्टर लगाया गया और न ही विशेष विमान।
कच्छ भूकंप : 2001
गुजरात के कच्छ जनपद में आए रिक्टर स्केल पर 7.7 के भूकंप से हजारों मकान तबाह हो गए। बीस हजार की मौत हुई और लाखों घायल हो गए। भूकंप के कारण 6 लाख परिवार बेघर हो गए। यहां बचाव अभियान में सेना और अर्द्धसैनिक बलों को मलबे के नीचे शवों और घायलों को निकालने में लगाया गया। यहां भी हेलीकाप्टर का प्रयोग सीमित संख्या में ही हुआ। जबकि विशेष विमान का प्रयोग सिर्फ राहत सामग्री भेजने के लिए किया गया।
बंगाल का सूखा - 1943
आजादी से पहले अविभाजित बंगाल में पड़ा सूखा 1940 से 1943 तक जारी रहा। इसमें 15 लाख से अधिक लोगों की जान गई। ब्रिटिश सरकार द्वितीय विश्व युद्ध होने के कारण मदद को आगे नहीं आई।
कांगड़ा का भूकंप - 1908
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में आए रिक्टर स्केल पर 7.8 क्षमता के भूकंप से बीस हजार लोगों की मौत हुई। इस भूकंप में एक लाख मकान क्षतिग्रस्त हुए। ब्रिटिश सरकार पुनर्वास के लिए कोई खास मदद नहीं कर पाई।
विश्व की पांच बड़ी प्राकृतिक आपदाएं
जापान की सुनामी : 2011 में जापान में आई सुनामी में 16 हजार लोगों की मौत हुई जबकि खरबों रुपये का नुकसान जापान को झेलना पड़ा।
नरगिस समुद्री तूफान : 2008 में वर्मा में आए नरगिस तूफान से तीन लाख लोगों की मौत हो गई थी।
चीन का भूकंप : जुलाई 1976 में चीन के तंगशान प्रांत में आए भूकंप से सात लाख लोगों मारे गए।
भोला समुद्री तूफान : 1970 बंगलादेश के समुद्रतट पर आया चक्रवती तूफान से पांच लाख लोगों की मौत हो गई।
चीन की बाढ़ : नवंबर 1931 में चीन की यलो नदी में आई बाढ़ से 30 लाख लोग मारे गए।
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