नेपाल सीमा से लगे सुनकुरी गांव में गौरा मेले की धूम मची हुई है। महिला और पुरुषों ने झोड़ों का गायन किया। गौरा मेले को लेकर सीमावर्ती गांवों के लोगों में खासा उत्साह बना हुआ हैं। मंदिर के पुजारी खिलानंद कलौनी हर रोज पूर्ण विधि-विधान के साथ तमाम अनुष्ठान करा रहे हैं।
गौरा-महेश की प्रतिमाएं बनाकर पूजन किया जा रहा है। झोड़ा, धमारी का गायन करने के साथ चाली नृत्य किया गया। पुरुषों ने रामायण का गायन किया। उन्होंने मात कौशल्या तुम बसी रय्या, हम तो जानू बनवास (मां कौशल्या से अयोध्या में रहने का निवेदन करते हुए बनवास जाने की अनुमति मांग रहे) आदि गीतों पर चाली नृत्य किया गया। मेले में समीपवर्ती गांवों में बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने मां गौरा देवी का आशीर्वाद लिया।
महोत्सव के आयोजन में आयोजन समिति के अध्यक्ष नर सिंह सामंत, उपाध्यक्ष विक्रम सिंह सामंत, सचिव उमेद सिंह सामंत, नैन सिंह सामंत, इंद्र सिंह सामंत, देव सिंह सामंत, पुष्कर सिंह सामंत, राजपाल सामंत, खीम सिंह सामंत, मनोज सिंह सामंत, मान सिंह सामंत, मनु देवी, नीला देवी, सरू देवी आदि सहयोग कर रहे हैं।
इधर चमदेवल के जिंडी गांव में भी गौरा महोत्सव की धूम मची हुई है। महोत्सव में ग्रामीण गौरा, धुमारी, चाली, झोला का गायन कर रहे हैं। बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं द्वारा बड़े ही उत्साह के साथ पूर्वजों की इस परंपरा का अनुसरण कर निर्वहन किया जा रहा है। महोत्सव में रामायण, महाभारत, श्रीकृष्ण लीला आदि का गायन किया जा रहा है। मुख्य अतिथि भारतीय जनता युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष मोहित पाठक, सुनील पांडेय, चंद्र सिंह अधिकारी, कुंवर सिंह, सतीश गहतोड़ी ने मां गौरा का आशीर्वाद लिया। मदन कलौनी की अध्यक्षता और कल्याण चंद के संचालन में चल रहे महोत्सव में खुशाल चंद, हरीश चंद, मोहन चंद, लक्ष्मण चंद, प्रेम चंद, रमेश चंद, गुमान चंद, हयात, चंद, दीपक चंद, खीमा देवी, बसंती देवी, पार्वती देवी, मुन्नी देवी, माया देवी, जानकी देवी आदि सहयोग कर रहे हैं।