फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

योग की सीख सुधार रहा बच्चों की मनोदशा

विज्ञापन
कोरोना के बाद स्कूल खुलने पर चंपावत के उदयन इंटरनेशनल स्कूल में योग से छात्र-छात्राओं को प्रेरित - फोटो : CHAMPAWAT
विज्ञापन
चंपावत। कोरोना महामारी ने स्कूली बच्चों के दिल और दिमाग पर दो साल तक गहरा असर डाला है। इस एकाकीपन और समूह की कमी का सबसे ज्यादा मार छात्र-छात्राओं के मानसिक विकास पर पड़ी है। नन्हें बच्चों की इस मनोदशा को बदलना अभिभावकों से लेकर शिक्षकों तक के लिए बेहद चुनौती बन रहा है। इससे उबारने के लिए यहां कई स्कूलों ने योग और खेल गतिविधियां को बढ़ावा दिया है। काउंसलिंग पर जोर दिया गया है।
विज्ञापन

चंपावत जिले के एक स्कूल का सातवीं का छात्र कोमल (बदला हुआ नाम) कोरोना के बाद स्कूल जाने से हिचकता है। कई बार गुस्सा करना और आपा खोना उसकी दिनचर्या में शुमार हो गया। अभिभावक किसी तरह बच्चे को स्कूल पहुंचाते लेकिन बच्चा वहां खोया रहता। ये उदाहरण कोरोना काल की ऑनलाइन पढ़ाई से कक्षा कक्ष की पढ़ाई तक के बदलाव की एक बानगी भर है। ऐसे अनेक उदाहरण कोरोना काल के बाद स्कूल खुलने पर आते रहे हैं। जानकार बताते हैं कि कोरोना महामारी ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मन:स्थिति को बदल दिया है। स्कूल बंद होने से लेकर खेल गतिविधियों पर लगी रोक के कारण घर से बाहर कम निकलने से बच्चों की दिनचर्या में बदलाव आ गया है। इन बदलाव ने बच्चों की शारीरिक और मानसिक हालत को झकझोरा है। इस जिले के गांवों में खुलेपन और अनुकूल आबोहवा से बहुत ज्यादा अंतर नहीं आया, लेकिन शहरी क्षेत्रों में किराये पर रहने वाले और खासकर छोटे परिवारों के बच्चों में ज्यादा बदलाव आए। घर में हमउम्र का साथ न मिलने से अकेलेपन के साथ घुटन की मनोदशा ने कुछ जगह अवसाद की स्थिति पैदा कर दी। लेकिन काफी स्कूल खासकर उदयन इंटरनेशनल, नंदा कॉन्वेंट स्कूल, यूसीएसएस स्कूल, एबीसी अल्मामतार सहित कई निजी स्कूलों ने बच्चों की परेशानियों को कम करने के लिए काउंसलिंग का सहारा लिया। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इससे काफी हद तक बच्चों की परेशानी को कम किया गया है।
मुख्य रूप से बच्चों में हुए ये बदलाव
व्यवहार और बोलचाल के ढंग में परिवर्तन।
लंबे समय तक एकाकीपन के कारण कई बच्चों को समूह में रहना नापसंद।
बच्चों के बर्ताव में बदलाव आया। आक्रामकता बढ़ने से उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ा।
बच्चों को व्यस्त और खुश रखें
बच्चे चंचल और उन्मुक्त प्रवृति के होते हैं। एक जगह रहना उनके स्वभाव में नहीं। मौज-मस्ती, उछलकूद, खेलना-पढ़ना उनके स्वभाव का अभिन्न हिस्सा है लेकिन कोरोना ने इन सबको प्रभावित किया है। इसके लिए ये जरूरी है कि उन्हें व्यस्त और खुश रखा जाए। पढ़ाई और किसी तरह का दबाव न डाला जाए। इससे उनकी मनोदशा में बदलाव धीमे-धीमे आएगा। - डॉ. जीबी बिष्ट, सेवानिवृत्त पीएमएस, नैनीताल।
विज्ञापन

योग बढ़ाया, कम किया मोबाइल फोन का उपयोग
कोरोना काल के बाद बच्चों में बड़ा बदलाव नजर आया। इसके समाधान के लिए स्कूल में नियमित रूप से योग की कक्षाएं शुरू की गई। खेलकूद को बढ़ावा दिया गया। सबसे ज्यादा नुकसान मोबाइल फोन कर रहा है। इसलिए मोबाइल फोन के उपयोग को कम करने के लिए अभिभावकों और बच्चों की काउंसलिंग कराई जा रही है। - विपिन चंद्र पांडेय, प्रधानाचार्य, उदयन इंटरनेशनल स्कूल, चंपावत।

Yoga Class in School of Champawat

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें