पीपीपी मोड में संचालित अस्पताल में दो माह से वेतन का भुगतान न किए जाने के विरोध में डॉक्टरों और कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार तीसरे दिन भी जारी रहा। हड़ताल से निपटने के लिए सीएमएस डा.मंजीत सिंह, डा.जितेंद्र जोशी, फार्मेसिस्ट मनोज कुमार, रोशन लाल, स्टाफ नर्स चंद्रकला, सीमा भट्ट, विनोद उप्रेती, सरोजनी बिष्ट, एलडी ओली, बीएम डंगवाल ने रोगियों का इलाज कर उन्हें दवाएं दी। शील अस्पताल प्रबंधन के उच्चाधिकारी ने हड़ताली कर्मचारियों को एक माह का वेतन सोमवार तक एवं दो माह का वेतन 14 जनवरी तक देने का आश्वासन दिया है।
यूनिट हैड रवि सिन्हा और प्रबंधक राजेंद्र जोशी का कहना है कि प्रबंधन के बार-बार वादाखिलाफी किए जाने से उनका यकीन समाप्त हो गया है। जब तक प्रबंधन की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिलता है, उनका कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। अलबत्ता वे आपात सेवा को बनाए रखेंगे। सीएमएस डा.मंजीत सिंह के अनुसार डॉक्टरों ने आपात सेवा बनाए रखने का आश्वासन दिया है, जिसे देखते हुए उनके खिलाफ आवश्यक सेवा अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। सीएमएस ने उम्मीद जाहिर की है कि सोमवार तक सभी डॉक्टर काम पर लौट आएंगे। चिकित्सालय में गंदगी को देखते हुए जब सीएमएस स्वयं झाडू़ पकड़ कर सफाई करने लगे तो वहां मौजूद हड़ताली स्वच्छकों ने चिकित्सालय में सफाई का काम शुरू कर दिया।
पर्वतीय क्षेत्र में अव्यवहारिक है पीपीपी मोड
चंपावत। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राजकीय अस्पतालों को पीपीपी मोड में दिए जाने को अव्यवहारिक बताया है। उन्होंने उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में पीपीपी मोड की प्रैक्टिस को गलत बताते हुए कहा कि उनके स्तर से पहली बार पिछले एक दशक के दौरान डॉक्टरों की नियुक्ति की जा रही है, जिससे चिकित्सालयों में सामान्य रूप से काम होने लगेगा।