जिले में मानसून सत्र में संभावित दैवीय आपदा से निपटने की कोशिश तेज हो गई है। जिले के पर्वतीय भूभाग में आपदा के दौरान सड़कों की स्थिति पर विशेष ध्यान रखने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत आपदा से संवेदनशील मोटर मार्गों और विभिन्न स्थानों में एलईडी (लाइट इफेक्टेटड डायोड) लगाए जाएंगे। इनमें विभिन्न मोटर मार्गों की स्थिति की जानकारी के साथ ही मौसम संबंधी अपडेट डाले जाएंगे। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय ने बताया कि पर्वतीय इलाकों के अलावा जिले के मैदानी क्षेत्र में संभावित जलभराव और बाढ़ की स्थिति पर पैनी निगाह रखने के लिए बाढ़ चौकियों की स्थापना के साथ ही प्रशिक्षित तैराक दल तैनात किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मोटर मार्गों में भूस्खलन को खतरे को देखते हुए नेशनल हाइवे पर जहां 15 जून से रात्रि आठ बजे से सुबह पांच बजे तक वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी, वहीं हाइवे में खतरे का सबब बने विशालकाय पेड़ों का छटान एक पखवाड़े के भीतर कर लिया जाएगा। इसके अलावा सड़कें बंद होने की स्थिति में उन्हें तत्काल खोलने के लिए संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को मय उपकरण के मौके पर मौजूद रहने को कहा गया है।
सिमली तोक के नौ परिवार हैं विस्थापन में शामिल
चंपावत। जिले में आपदा से प्रभावित संवेदनशील कोई भी गांव नहीं है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी के अनुसार बाराकोट विकासखंड के बैड़ाओड़ ग्राम पंचायत के सिमली तोक के नौ परिवारों को आपदा की दृष्टि से अन्यत्र विस्थापित किया जाना है। लेकिन अब तक शासन की ओर से उनके पुनर्वास के लिए भूमि आदि की तलाश पूरी नहीं हो सकी है।