चंपावत। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग के महिला आयोग आपके द्वार अभियान के तहत बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में महिला जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने की।
जनसुनवाई में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आईं महिलाओं ने पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा और सामाजिक योजनाओं से जुड़ी समस्याएं आयोग के समक्ष रखीं। कुल 17 शिकायतें दर्ज की गई। कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। गंभीर प्रकरणों को आगे की कार्रवाई के लिए देहरादून भेजा गया। आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को शिकायतों पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उन्हें संतुष्ट कर ही भेजा जाए। घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में पीड़ित महिलाओं की वन स्टॉप सेंटर में काउंसलिंग कराने और पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।
इस दौरान वन स्टॉप सेंटर की समीक्षा में प्रशासक रितु सिंह ने बताया कि वर्ष 2019 से 2026 तक दर्ज 364 मामलों में से 337 का निस्तारण किया जा चुका है। संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर पुष्पा चौधरी ने किया। इस दौरान आयोग की सदस्य किरण, पालिकाध्यक्ष प्रेमा पांडेय, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोरा, सीडीओ डॉ. जीएस खाती, एडीएम कृष्णानाथ गोस्वामी, सीओ वंदना वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी पीएस बृजवाल समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
पत्नी मिलन की आस, महिला आयोग से गुहार
चंपावत। महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान करीब सात महिलाएं घरेलू समस्याएं लेकर आई। इसमें कुछ महिलाओं के पति लंबे समय से दूर हैं। ऐसे में महिलाओं ने अपनी समस्या आयोग की अध्यक्ष के सामने रखीं। इस दौरान एक व्यक्ति भी पत्नी को वापस लाने के लिए महिला आयोग के समक्ष उपस्थित हुआ। उसकी पत्नी कई साल से किसी बात पर नाराज हो गई थी और आज तक वापस नहीं लौटी। पति ने कई प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब महिला आयोग ने उन्हें आश्वास्त किया है। इस मौके पर एक महिला के पति को बुलाकर सुलह करने का प्रयास भी किया गया। पानी, पेंशन, भरण पोषण की समस्याएं भी महिलाओं ने रखीं।
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